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जैन पाठशाला के माध्यम से अच्छे संस्कारों का बीजारोपण : निःशुल्क अध्यापन से निखर रहे जैन समाज के बच्चे


बांसवाड़ा जिले के इस नगर में 200 घरों की जैन समाज है। जहां पर विशाल 52 डेरी आदिनाथ भगवान का जिनालय, भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदेव तीर्थ क्षेत्र नसिया जी जिनालय है। यहां पर प्रतिदिन मंदिर में शांतिधारा अभिषेक होता है एवं नगर में 100 वर्ष पुरानी जैन पाठशाला है। इसमें 150 बच्चे प्रतिदिन नियमित रूप से जैन धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन कर रहे हैं।नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह खबर…


नौगामा। बांसवाड़ा जिले के इस नगर में 200 घरों की जैन समाज है। जहां पर विशाल 52 डेरी आदिनाथ भगवान का जिनालय, भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदेव तीर्थ क्षेत्र नसिया जी जिनालय है। यहां पर प्रतिदिन मंदिर में शांति धारा अभिषेक होता है एवं नगर में 100 वर्ष पुरानी जैन पाठशाला है। जहां पर वर्तमान में 150 बच्चे प्रतिदिन शाम को जैन पाठशाला में नियमित रूप से जैन धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करते हैं। यहां महिला मंडल द्वारा छात्रों को निःशुल्क अध्ययन कराया जाता है। जैन पाठशाला के बच्चे प्रति रविवार मंदिर में सामूहिक रूप से वाद्ययंत्रों के मधुर स्वरों के साथ सामूहिक रूप से पूजन करते हैं एवं पूजन के बाद श्रेष्ठी जनों द्वारा सभी छात्रों को अल्पाहार एवं पुरस्कार दिए जाते हैं। रविवार का पुरस्कार वितरण धाराश राजेंद्र कुमार द्वारा सभी को प्रदान किया गया।

जैन पाठशाला की अध्यापिका मनीषा नानावटी, कुसुम लता नानावटी ने बताया कि इन बच्चों को धार्मिक शिक्षण के साथ-साथ साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी सिखाए जाते हैं। जिससे वह धार्मिक आयोजन पर इन कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं और समय-समय पर इन बालकों को धार्मिक स्थलों का दर्शन भी करवाया जाता है एवं प्रतिवर्ष सांगानेर संस्थान जयपुर से 15 दिवसीय संस्कार शिविर लगाए जाते हैं।

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