जैन धर्म के प्रचार के लिए सदैव धर्म की पताका फहराने वाले आचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज के समाधि मरण के समाचार ने सम्पूर्ण जैन समाज को स्तब्ध कर दिया। सन्मति जैन काका ने बताया कि इस अवसर पर श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर जी में सभी समाजजनों ने मंदिर जी में णमोकार महामंत्र का जाप किया। पढ़िए सन्मति जैन की रिपोर्ट…
सनावद। जैन धर्म के प्रचार के लिए सदैव धर्म की पताका फहराने वाले आचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज के समाधि मरण के समाचार ने सम्पूर्ण जैन समाज को स्तब्ध कर दिया। सन्मति जैन काका ने बताया कि इस अवसर पर श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर जी में सभी समाजजनों ने मंदिर जी में णमोकार महामंत्र का जाप किया। तत्पश्चात भक्तामर जी पाठ किया गया। अंत अनुभव जैन ने आचार्य श्री के प्रति अपनी विनयांजलि प्रकट करते हुुए कहा कि आज 4 माह में जैन जगत के लिए दो बड़ी क्षति हुई हैं।
पहले आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज और अब आचार्य विराग सागर जी महाराज की जालना (महाराष्ट्र)शहर के नजदीक देवमूर्ति ग्राम, सिंदखेडा राजा रोड पर समाधि हुई है। असामायिक समाधि का समाचार समाज के लिए बहुत ही स्तब्ध करने वाला है। प्रशांत जैन अपने भाव प्रकट करते हुए बताया कि सनावद नगरी में आज से 11 वर्ष पूर्व वर्ष 2013 में सब से बड़े महासंघ (78पिच्छी) के साथ आप पावागिरि ऊन से सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकुट की ओर विहार करते समय सनावद में अल्प प्रवास कर के आप ने अपनी ओजस्वी वाणी से सभी को कृतार्थ किया था एवं आहार करवाने का सौभाग्य दिया था।
पंडित अचित्य जैन ने आचार्य श्री के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य श्री बहुत सरल सहज व ज्ञान की खान थे। उन्होंने अनेक ग्रंथो ने रचना की जो के समाज के लिए बहुत ही लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं। आप ने अपने जीवन काल में 9 आचार्य पद प्रदान किए। आप के सभी शिष्य आज जैन समाज के लिए धर्म के प्रभावना में सहभागिता कर रहे हैं।













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