तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के ऑडिटोरियम में आयोजित सितार और तबला जुगलबंदी ने विद्यार्थियों का मन मोह लिया। पंडित (डॉ.) हरविंदर शर्मा और युवा तबला कलाकार उजिथ उदय कुमार की बेहतरीन प्रस्तुति ने श्रोताओं में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति अद्भुत आकर्षण जगाया। कार्यक्रम में 700 से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए। पढ़िए प्रो. श्याम सुंदर भाटिया की रिपोर्ट…
मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के ऑडिटोरियम में मंगलवार को भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुरमयी धुनों ने ऐसा वातावरण रच दिया कि पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह से लगातार गूंजता रहा। प्रसिद्ध सितार वादक पंडित (डॉ.) हरविंदर शर्मा और युवा तबला वादक उजिथ उदय कुमार की जुगलबंदी ने विद्यार्थियों को भारतीय संगीत की गहराई, साधना और भावस्पर्शी लय से परिचित कराया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन, एमएलसी डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त, स्पिक मैके के रीजनल कोऑर्डिनेटर डॉ. आरसी गुप्ता, डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. मुकुल किशोर, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. एमपी सिंह सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
व्यक्तित्व, सांस्कृतिक समझ और सृजनशीलता को विस्तार देने का माध्यम
एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन ने कहा कि टीएमयू सिर्फ शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और कला को संरक्षित करने की दिशा में भी समान रूप से समर्पित है। उनका मानना है कि सितार रेसाइटल जैसे आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, सांस्कृतिक समझ और सृजनशीलता को विस्तार देने का माध्यम बनते हैं।
शर्मा भारतीय शास्त्रीय संगीत के छह दशक पुराने साधक
मुख्य प्रस्तुति पंडित (डॉ.) हरविंदर शर्मा ने दी, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत के छह दशक पुराने साधक हैं। टीएमयू में उनका यह पहला आगमन था, जहां उन्होंने अपनी अनोखी सुर लहरियों से लगभग 700 विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी परंपरा, शोध और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दी गई प्रस्तुतियों ने उन्हें संगीत जगत में विशिष्ट पहचान दिलाई है। उनके पिता श्री मेघराज शर्मा उनके गुरु और प्रेरणा स्रोत रहे हैं। उन्होंने भारत सहित कई देशों में अपनी कला का प्रदर्शन किया और 2023 में संगीत नाटक अकादमी अवार्ड सहित अनेक सम्मान प्राप्त किए।
उँगलियाँ तबले की थापों के साथ थिरकने लगी
उन्हें तबला संगत देने वाले युवा कलाकार उजिथ उदय कुमार की ताल और लयकारी ने कार्यक्रम को और भी जीवंत बना दिया। कहा जाता है कि उनकी उंगलियाँ तीन वर्ष की उम्र से ही तबले की थापों के साथ थिरकने लगी थीं। उन्हें भारत के उपराष्ट्रपति द्वारा भारत के ध्रुवतारा की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। उनके उस्ताद रफीउद्दीन साबरी और पिता चेतन उदय कुमार ने उनके संगीत सफर को दिशा दी है।
संगीत की साधना, परंपरा और सुरों की आध्यात्मिकता
इस भव्य आयोजन को टीएमयू, स्पिक मैके, संस्कृति मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, युवा मामले मंत्रालय, उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग और भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के संयुक्त सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। टीएमयू स्टूडेंट क्लब्स ने भी बड़ी भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनी सरस्वत ने किया, जबकि आयोजन का समन्वयन प्रो. विपिन जैन के निर्देशन में हुआ। यह आयोजन विद्यार्थियों को संगीत की साधना, परंपरा और सुरों की आध्यात्मिकता से जोड़ने वाला अविस्मरणीय अनुभव साबित हुआ।













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