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आत्मा को शुद्ध और जीवन को सार्थक बनाने का माध्यम सिद्धचक्र विधान: तिलकनगर में आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज के सान्निध्य में हुई विधान की शुरूआत 


आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में आठ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान की शुरूआत हुई। तिलकनगर जैन मंदिर परिसर में महोत्सव को लेकर बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। इंदौर से पढ़िए, यह साभार संकलित खबर…


इंदौर। आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में आठ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान की शुरूआत हुई। तिलकनगर जैन मंदिर परिसर में महोत्सव को लेकर बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। महोत्सव के अध्यक्ष राहुल जैन केसरी ने बताया कि विधान में प्रतिदिन सुबह 6.45 बजे वंदना, अभिषेक, अर्घ्य, स्वाध्याय, पूजन, कलश स्थापना, प्रवचन और शाम को आरती और ध्यान सत्र का आयोजन किया जाएगा। 5 नवंबर को शांतिधारा, महापूजन और महाआरती के साथ विधान का समापन होगा। पहले दिन सुबह मंगलाचरण और पूजा-अर्चना के बीच ध्वजारोहण नम्रता प्रवीण दिवाकर द्वारा किया गया। मंडप उद्घाटन नवीन शिवानी गोधा, धमेंद्र संध्या जैन और मनीष संगीता नायक ने किया।

आयोजन में समाज के संरक्षक राजेश उदावत, विमल अजमेरा और राजू श्रीफल विशेष रूप से उपस्थित थे। इस अवसर पर आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज ने कहा कि विधान का आयोजन केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि आत्मा को शुद्ध करने और जीवन को सार्थक बनाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि सिद्धचक्र विधान वर्ष में एक बार अवश्य किया जाना चाहिए।

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