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अष्टानिका समापन पर सिद्धचक्र मंडल विधान रचाया : सनावद में हुए विधान में मांडने पर किए 120 अर्घ्य समर्पित 


धर्म प्रभावना में अग्रणी रहने वाले वाले नगर में फाल्गुन माह की अष्टानिका पर्व के समापन पर श्री आदिनाथ जिनालय में सिद्ध चक्र मंडल विधान रचाया गया। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह रिपोर्ट…


सनावद। धर्म प्रभावना में अग्रणी रहने वाले वाले नगर में फाल्गुन माह की अष्टानिका पर्व के समापन पर श्री आदिनाथ जिनालय में सिद्ध चक्र मंडल विधान रचाया गया। जैन धर्म में अष्टानिका पर्व (अष्टाह्निका) साल में तीन बार आती है। यह आठ दिनों का एक प्रमुख शाश्वत पर्व है, जो कार्तिक,फाल्गुन और आषाढ़ महीनों में शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक मनायी जाती है। इसी फाल्गुन माह की अष्टानिका के समापन पर मंगलवार को आदिनाथ जिनालय में प्रात: 7.15 बजे से अभिषेक, शांतिधारा के बाद आचार्य श्री विप्रणत सागर जी महराज द्वारा रचित सिद्ध चक्र मंडल विधान रचाया गया।

जिसमें 120 अर्घ्य सभी समाजजनों ने समर्पित किए। इस अवसर पर प्रफुल्ल जैन, पूर्णिमा जैन, महिमा जैन ने पूजन कराई। इस अवसर पर राजेश जटाले, पुष्पेंद्र पंचोलिया, अनित जटाले, तपन जैन, कमल काला, सुनील भूच,नंदलाल जैनी, टीकमचंद जैन, ज्ञानचंद भूच, हेमा जैन, विभूति अप्सरा जैन, राजकुमारी पंचोलिया, नैना चौधरी, प्रीति जटाले, सुनीता लश्करे, रूपल चौधरी, प्रभा लश्करे, प्रतिभा जैन, लेखमाला जैन, रीना जैन सहितसभी समाजजन उपस्थित होकर धर्म प्रभावना में सहायक बने।

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