दिगंबर जैनाचार्य वात्सल्य वारिधि श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के सुशिष्य मुनि श्री अपूर्व सागर जी, मुनि श्री अर्पित सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य और प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया ‘विरल’ (सागवाड़ा) के निर्देशन में करावली जिला सलूंबर में श्री बीसा नरसिंहपुरा सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा सिद्ध परमेष्ठी भगवंतों के 1008 गुणों की भक्ति एवं गुणानुवाद हेतु 6 दिवसीय श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान पूजन का आयोजन भक्ति भाव एवं धर्म प्रभावना पूर्वक चल रहा है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
धरियावद। दिगंबर जैनाचार्य वात्सल्य वारिधि श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के सुशिष्य मुनि श्री अपूर्व सागर जी, मुनि श्री अर्पित सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य और प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया ‘विरल’ (सागवाड़ा) के निर्देशन में करावली जिला सलूंबर में श्री बीसा नरसिंहपुरा सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा सिद्ध परमेष्ठी भगवंतों के 1008 गुणों की भक्ति एवं गुणानुवाद हेतु 6 दिवसीय श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान पूजन का आयोजन भक्ति भाव एवं धर्म प्रभावना पूर्वक चल रहा है। दिगंबर जैन समाज के अशोक कुमार जेतावत (धरियावद) ने बताया कि 6 दिवसीय श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान पूजन आयोजन के दूसरे दिन रविवार को विविध धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। विधान पूजन के सौधर्म इंद्र गोविंद संगावत परिवार व अन्य इंद्र-इंद्राणी परिवार समूहों द्वारा श्री पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा एवं श्री सिद्ध चक्र यंत्र का अभिषेक किया गया। साथ ही विश्व शांति की कामना के लिए भगवती लाल कस्तूरचंद टाया परिवार द्वारा श्रीजी की प्रतिमा पर शांतिधारा की गई। आज करावली गांव के श्री सुपार्श्वनाथ जिनालय के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की वर्षगांठ होने से पन्नालाल शांतिलाल टाया परिवार द्वारा मंदिर शिखर पर नवीन ध्वजा परिवर्तन किया गया।
उमड़े श्रद्धालु
जेतावत ने बताया कि युगल मुनिराज ससंघ सान्निध्य, प्रतिष्ठाचार्य के कुशल निर्देशन एवं संगीतकार की मधुर धुन और स्वर लहरियों में सिद्ध चक्र महामंडल विधान पूजन के इंद्र-इंद्राणी परिवारों ने विधान पूजन की क्रमशः तीसरी, चौथी एवं पांचवीं पूजा के तहत क्रमशः 32, 64 और 128 अर्घ्य समर्पित किए। रविवारीय धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री अपूर्व सागर जी महाराज ने कहा कि पूजा मुक्ति का कारण है और सिद्ध प्रभु की पूजा अष्ट कर्मों के कारावास से मुक्त कराती है। धर्मसभा में आज दिगंबर जैन समाज सलूंबर, उदयपुर और कुशलगढ़ के पंचमहानुभावों ने युगल मुनिराज श्री अपूर्व सागर जी महाराज, मुनि श्री अर्पित सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी महाराज ससंघ को आगामी वर्षायोग 2024 को अपने-अपने शहरों एवं नगरों में धर्म प्रभावना पूर्वक कराने हेतु श्रीफल भेंट कर निवेदन (विनती) किया।
सांयकाल श्रीजी की आरती, गुरु भक्ति, गुरु वंदना और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। आज रविवारीय अवकाश के चलते करावली (सलूंबर) में सिद्ध चक्र महामंडल विधान पूजन में आसपास के गांवों, शहरों और नगरों से श्रद्धा का ज्वार उमड़ पड़ा और श्रीजी का अभिषेक, पूजन और मुनिश्री के मंगल प्रवचन श्रवण का लाभ लिया।













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