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श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन एवं रथयात्रा रविवार को: सभी जिन प्रतिमाएं अभिषेक के बाद श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में होंगी विराजमान 


श्री विद्याप्रमाण गुरु कुलम् अवधपुरी में संस्कृत भाषा में निबद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन रविवार को प्रातः कालीन बेला में होने जा रहा है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया विगत 4 अक्टूबर से यहां श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ हुआ था। उसका समापन रविवार को होगा। अवधपुरी(भोपाल) से पढ़िए, यह खबर...


अवधपुरी (भोपाल)। श्री विद्याप्रमाण गुरु कुलम् अवधपुरी में संस्कृत भाषा में निबद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन रविवार को प्रातः कालीन बेला में होने जा रहा है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया विगत 4 अक्टूबर से यहां श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ हुआ था। उसका समापन रविवार को होगा। प्रात:6 बजे से अभिषेक एवं शांतिधारा नित्य नियम पूजन के पश्चात हवन एवं 9 बजे से रथयात्रा श्री विद्याप्रमाण गुरुकुलम् से मुनिसंघ के सानिध्य में प्रारंभ होगी, जो समन्वयनगर होती हुई वापस विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में आएगी। सभी जिन प्रतिमाओं का अभिषेक उपरांत श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान किया जाएगा। जैन ने बताया विधान के सातवें दिवस मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज एवं मुनि श्री संधान सागरजी महाराज ने अपने मुखारबिंद से पंच परमेष्ठी श्री अरहंतजी, सिद्धजी, आचार्यजी, उपाध्याय जी तथा सर्व साधुओं की आराधना करते हुए दोपहर 12 बजे तक 512 अर्घ्य पूर्ण भक्ति भाव के साथ चढ़ाए गए तथा शनिवार को भगवान के सहस्त्र नामों के साथ 1024 अर्घ्य चढ़ाए जाएंगे। इस मौके पर मुनि श्री ने पंच परमेष्ठी के 143 मूलगुणों की चर्चा करते हुए कहा कि इन्ही मूलगुणों के आधार पर इन परमेष्ठियों की पहचान हुआ करती है। मूलगुणों से ही उनके आचार-व्यवहार तथा चर्या को देखा जाता है।

साधु परमेष्ठी में 28 मूल गुण समाहित होते हैं

जब आचार्य परमेष्ठी के गुणों की चर्चा आई तो मुनि श्री ने कहा कि आचार्य गुरुदेव में वह सभी मूल गुण परिलक्षित होते थे। उनकी चर्या में मूलाचार समाया हुआ था। उन्होंने कहा कि अरिहंत भगवान में छियालीस, सिद्ध भगवान में आठ, आचार्य परमेष्ठी में छत्तीस, उपाध्याय परमेष्ठी में पच्चीस तथा साधु परमेष्ठी में 28 मूल गुण समाहित होते हैं। उन सभी मूल गुणों की आज आप लोगों ने बड़े ही भक्ति भाव के साथ आराधना की। इस अवसर पर समस्त क्षुल्लक आदरसागर जी, श्री समादर सागर जी, श्री चिद्रूप सागर जी, श्री स्वरूपसागर जी तथा श्री सुभग सागर जी महाराज एवं सभी ब्रह्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन बाल ब्र. अभय भैया आदित्य तथा अशोक भैया लिधोरा ने किया।

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