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विश्व शांति की कामना के साथ श्री शांतिनाथ महामंडल विधान पूर्ण: धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल


जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी स्वर्गीय जगदीशचंद्र जैन वरेह वालों की स्मृति में श्री महावीर जिनालय, चुंगी नाका रोड पर श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने भगवान से विश्व शांति एवं जनकल्याण की प्रार्थना की। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर…


अंबाह। जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी स्वर्गीय जगदीशचंद्र जैन वरेह वालों की स्मृति में श्री महावीर जिनालय, चुंगी नाका रोड पर श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने भगवान से विश्व शांति एवं जनकल्याण की प्रार्थना की। प्रातःकाल मंदिर में मूल नायक भगवान श्री धर्मनाथ का अभिषेक कर विधान की शुरुआत हुई। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने विशेष अर्घ्यों के माध्यम से श्री शांतिनाथ भगवान के समक्ष श्रीफल चढ़ाकर विशेष आराधना की। महावीर प्रसाद जैन, दिनेश कुमार जैन, विमल कुमार जैन एवं सुनील जैन ने सभी धार्मिक क्रियाओं का संचालन किया। विधान के दौरान मधुर भजनों के गायन ने वातावरण को भक्ति और श्रद्धा से पूर्ण कर दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार और हवन के माध्यम से संपूर्ण विश्व में शांति की कामना की। आयोजन का विश्वशांति महायज्ञ एवं हवन विधि-विधान के साथ पूर्ण हुआ। हवन के दौरान श्रद्धालुओं ने आहुतियां देते हुए भगवान से जनकल्याण, समाज कल्याण और विश्व शांति की प्रार्थना की।

श्री शांतिनाथ भगवान की आराधना से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है

आयोजक दिनेश जैन व परिजनों ने बताया कि श्री शांतिनाथ भगवान की आराधना से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने यह भी साझा किया कि इस परंपरा की उत्पत्ति पुराणों में वर्णित है। बताया गया कि रामायण काल में भगवान मुनिसुव्रत नाथ के शासनकाल में मथुरा नगर में महामारी फैल गई थी और हजारों प्रजाजन हताहत होने लगे। उस समय मुनिराज ने भगवान श्री शांतिनाथ की पूजा-अर्चना करने का उपदेश दिया और इस अनुष्ठान के परिणामस्वरूप महामारी का शमन हुआ। तभी से जैन समाज में यह धार्मिक आयोजन निरंतर होता आ रहा है।

श्रद्धालुओं ने इस कार्यक्रम को पुण्यदायक बताया

कार्यक्रम के समापन पर वात्सल्य भोज का आयोजन किया गया, जिसमें सभी उपस्थित श्रद्धालु एक साथ भोजन कर आपसी स्नेह और मेल-जोल का अनुभव करते हुए लौटे। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण को सुदृढ़ किया, बल्कि समाज में एकता, भक्ति भाव और सहयोग की भावना को भी प्रबल किया। श्रद्धालुओं ने इस कार्यक्रम को अत्यंत प्रभावशाली और पुण्यदायक बताया। स्वर्गीय जगदीश चंद्र जैन की स्मृति में यह महामंडल विधान उनकी जीवन मूल्यों, समाज सेवा और भक्ति की प्रतिबद्धता को याद दिलाता है। इस आयोजन ने शहर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को भी जागृत किया और सभी को यह संदेश दिया कि भक्ति, एकता और सेवा के माध्यम से समाज में सद्भाव और शांति कायम की जा सकती है।

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