श्री आदिनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विराग महार्चना विधान 31 दिसंबर से 5 जनवरी तक आयोजित किया जा रहा है। नूतन वर्ष पर दादा गुरु समाधि सम्राट की महार्चना विधान एवं कवि सम्मेलन भी किया जाएगा। इसमें सभी समाजजन उत्साह से भाग लेंगे। भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर…
भिंड। नगर को एक अदभुत और पवित्र अयोध्या नगरी माना जाता है। जहां पर 35 से ज्यादा जिनालय अपनी दिव्यता से इस भूमि को प्रकाशमान करते हैं। यहीं स्थित है भव्य और सुंदर महावीर कीर्ति स्तंभ जैन मंदिर, जो मन को शांति और श्रद्धा से भर देता है। नंदीश्वर जिनालय अनोखी और आध्यत्मिक शक्ति का परिचय कराती है। इस पुण्य भूमि का सौभाग्य है कि यहां आचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज का प्रथम गुरु मंदिर, जो उनके परम् प्रभावी शिष्य मुनिश्री विनयसागर जी महाराज द्वारा नवनिर्मित करवाया है। ऐसी पावन भूमि पर फिर से मुनि श्री विनय सागर जी महामुनिराज के मंगल सानिध्य में 31 दिसंबर से 5 जनवरी तक श्री 1008 आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विराग महार्चना विधान किया जाएगा।
एक शाम गुरु के नाम होगा
जैन समाज जिला प्रवक्ता सोनल जैन ने बताया कि श्री 1008 आदिनाथ जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं नूतन वर्ष के आगमन पर गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज की महार्चना विधान एवं एक शाम गुरु के नाम कार्यक्रम भी होगा। जिसमे रात्रि में कवि सम्मेलन होगा। इस भव्य पंचकल्याणक महोत्सव में अपनी उपस्थिति देकर अपने पुण्य लाभ लें।













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