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श्री आदिनाथ महिला मंडल ने संत शिरोमणिआचार्य विद्यासागर को अर्पित की विनयांजलि : जीवन को संयम नियम से बिताने का लिया संकल्प


सोमवार को श्री आदिनाथ महिला मंडल ने आचार्य विद्यासागर जी महाराज को विनयांजलि अर्पित की। श्री आदिनाथ महिला मंडल की संस्थापक श्रीमती ऊषा राकेश जैन भंडारी ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज न केवल जैन समाज के बल्कि सभी समाज के राष्ट्रीय संत थे। पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट ।


अम्बाह। आचार्य विद्यासागर जी महाराज के समाधिस्थ होने से अम्बाह जैन समाज के लोग आहत हैं। सोमवार को श्री आदिनाथ महिला मंडल की पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने आचार्य श्री के समाधिस्थ होने पर विनयांजलि अर्पित की मौजूद महिलाओं ने उन्हें राष्ट्र निर्माता और सृजनात्मक सोच के साथ कार्य करने वाला अद्भुत और विराट व्यक्तित्व का धनी बताया। श्री आदिनाथ महिला मंडल की संस्थापक श्रीमती ऊषा राकेश जैन भंडारी ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज न केवल जैन समाज के बल्कि सभी समाज के राष्ट्रीय संत थे।

आचार्य श्री ने हथकरघा उद्योग, गौ माता के संरक्षण, असंख्य गोशालाओं की स्थापना,शिक्षण संस्थानों की स्थापना के जरिये लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई थी, उनका संपूर्ण जीवन मानवता के कल्याण में बीता था, उन्होंने सामाजिक सुधार, धार्मिक सुधार, शैक्षणिक सुधार,आर्थिक सुधार, राष्ट्र कल्याण के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए थे यही वजह है कि आचार्य श्री का योगदान न केवल जैन समाज बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के लिए रहा है।

संगठन की अध्यक्ष श्री मती बबिता जैन ने कहा कि आचार्य श्री की मुस्कुराहट और उनसे मिले आशीर्वाद से लोगों का जीवन प्रगति के पथ पर अग्रसर हो जाता था। वह आधुनिक काल के महावीर थे, वह विद्वत्ता की खान, मृदुभाषी, जन कल्याणकारी और आम जनता के दुखों को दूर करने वाले थे साथ ही वह दिव्य ज्योति से युक्त एक अद्वितीय व्यक्तित्व थे, इस दौरान णमोकार महामंत्र का पाठ कर आचार्य श्री को विनयांजलि अर्पित की गई। इसके साथ ही उपस्थित महिलाओं ने अपने जीवन को संयम नियम से बिताने का भी संकल्प लिया।

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