समाचार

धर्मनिष्ठ, व्यवहार कुशल, प्रभावशाली श्री विमल चंद जी जैन पाटनी नहीं रहे : 1 जनवरी 1946 को धर्म प्राण नगरी उज्जैन जिले के परसोली में हुआ था जन्म


धर्मनिष्ठ व्यवहार कुशल प्रभावशाली श्री विमल चंद जी जैन पाटनी का स्वर्गवास अष्टानिका पर्व चतुर्दशी के दिन 14 नवंबर गुरुवार दोपहर 12.30 मिनिट पर हो गया। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


कोटा (राजस्थान)। धर्मनिष्ठ व्यवहार कुशल प्रभावशाली श्री विमल चंद जी जैन पाटनी का स्वर्गवास अष्टानिका पर्व चतुर्दशी के दिन 14 नवंबर गुरुवार दोपहर 12.30 मिनिट पर हो गया। नमोकार महामंत्र, मेरी भावना, तत्वार्थ सूत्र, वैराग्य भावना सुनते हुए उन्होंने अपनी देह का त्याग किया।

व्यवहार कुशल, प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी, धर्मनिष्ठ थे श्री विमल पाटनी जी

मां चर्मण्यवती के पावन तट पर स्थित संपूर्ण भारत में शिक्षा के लिए सुविख्यात शिक्षा की काशी धर्म प्राण नगरी कोटा के देव, शास्त्र, गुरु के परम भक्त, व्यवहार कुशल, प्रभावशाली व्यक्तित्व एवं धर्मनिष्ठ आदरणीय श्रीमान विमल चंद जी पाटनी का जन्म 1 जनवरी 1946 को धर्म प्राण नगरी उज्जैन जिले के परसोली ग्राम में श्रावक श्रेष्ठी श्रीमान केसरीमल जी एवं माताश्री श्रीमती केसर बाई के घर आंगन में हुआ। आदरणीय श्रीमान विमल चन्द जी पाटनी के तीन भाई एवं तीन बहिनों का परिवार है। जो क्रमशः तेज कुमार जी, नेमीचंद जी, बहनें शांति जी टोंग्या, कमला जी लुहाड़िया एवं गुणमाला जी बेनाडा है। विमलजी स्वयं दूसरे नम्बर के सुयोग्य सुपुत्र थे। उनके पुत्र ने बताया कि 16 अगस्त 2022 को ब्रेन पैरालाइसिस अटैक की बीमारी से ग्रसित हो गए थे। तभी से उनके सुपुत्र श्री पारस जी पार्श्वमणि एवं पुत्र वधु सारिका जी ने दिन रात आपकी काफी सेवा सुश्रुषा की। प्रतिदिन उनको नमोकार महामंत्र, मेरी भावना विनय पाठ, भक्तामर पाठ, तत्वार्थ सूत्र वैराग्य भावना इत्यादि प्रतिदिन सुनाते थे।

श्रीमती शांति देवी जी के साथ हुआ शुभ विवाह

आदरणीय श्रीमान विमल चंद जी पाटनी का शुभ विवाह आगर मालवा जिले के तनोडिया ग्राम के श्रावक श्रेष्ठी श्रीमान चम्पा लाल जी बाकलीवाल की सुयोग्य, संस्कारवान सुपुत्री श्रीमती शांति देवी जी के साथ हुआ। आपके एक सुयोग्य सुपुत्र, सर्व श्रेष्ठ संवाददाता, अवॉर्ड विजेता, 35 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र के उल्लेखनीय योगदान दिया। 15 लाख मासूम बच्चों को मांसाहारी होने से बचाया, भाव पूर्ण भजनों की शानदार प्रस्तुति देने वाले श्री पारस जी जैन पार्श्वमणि हैं। जिनका शुभ विवाह बारां कुंजेड़ निवासी श्रावक श्रेष्ठी श्रीमान कैलाश चंद जी-श्रीमती कौशल्या देवी जी की सुयोग्य सद संस्कारों से युक्त सुपुत्री श्रीमती सारिका जी के साथ संपन्न हुआ। अभी हाल ही में राजस्थान की राजधानी गुलाबी नगरी जयपुर में मुख्यमंत्री निवास पर पहली बार सामूहिक क्षमावाणी का भव्य आयोजन किया गया। उस अवसर पर श्री पारस जी जैन पार्श्वमणि को वर्तमान का श्रवण कुमार एवं श्रीमती सारिका जी जैन को सतयुग की नारी की उपाधि से अलंकृत मुख्य मंत्री द्वारा किया गया। अपार जन सैलाब की उपस्थिति में आचार्य शशांक सागर जी महाराज सहित 13 दिगंबर श्वेतांबर संतों के पावन सानिध्य में किया गया। आपकी सुपुत्री श्रीमती ममता जी जैन का शुभ विवाह (अटरु वाले) श्री राजेन्द्र जी अजमेरा के साथ हुआ, जो अभी महावीर नगर द्वितीय में निवास करते हैं। उनकी दो पोत्रियां खुशबू एवं गरिमा जैन है एवं एक नाती प्रबल जैन और एक नातिन चंचल जैन है।

21 साधु-संतों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ, समाज जनों ने दी वियनांजलि

हाल ही में उन्होंने दसलक्षण महापर्व पर आठ उपवास एवं दो व्रत किए। उन्हें 21 साधु-संतों का आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ। हम सभी जिनेन्द्र देव के चरणों में निवेदन करते हैं कि दिवंगत आत्मा को शांति एवं सद्गति मिले। उनके परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्राप्त हो। संचालन जीवंधर सोगानी ने किया। राजकुमार जी टिल्लू झालरापाटन द्वारा रचित विनयांजलि को विवेक जैन ने बहुत ही भावपूर्ण होकर सुनाया। राजमल पाटौदी कोटा, रविंद्र जैन काला बूंदी इंदौर, दिगम्बर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन ने भी भाव पूर्ण विनियांजलि प्रस्तुत की।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
1
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page