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गुरु उपकार महोत्सव में जिनवाणी का दिया ज्ञान : श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का विद्वानों के सम्मान के साथ समापन


डूंगरपुर जिले में श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर द्वारा आयोजित नव दिवसीय संस्कार शिविर विरोदय तीर्थ में मुख्य अतिथि 18000 दशा हुमड़ समाज के अध्यक्ष दिनेश खोड़निया, शिक्षण संस्था के अध्यक्ष धनपाल लालावत एवं विरोदय ट्रस्ट के अध्यक्ष मोहनलाल पिंडारमियां सानिध्य में समाप्त हुआ। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


 बांसवाड़ा। डूंगरपुर जिले में श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर द्वारा आयोजित नव दिवसीय संस्कार शिविर विरोदय तीर्थ में मुख्य अतिथि 18000 दशा हुमड़ समाज के अध्यक्ष दिनेश खोड़निया, शिक्षण संस्था के अध्यक्ष धनपाल लालावत एवं विरोदय ट्रस्ट के अध्यक्ष मोहनलाल पिंडारमियां सानिध्य में समाप्त हुआ। मंगलाचरण के साथ आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज की तस्वीर चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलित कर समापन समारोह का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर शिविरों के संयोजक अंकेश भैया ने बताया कि वागड़ प्रांत में 21 गांव में संस्कार शिविरों का आयोजन किया गया था। इन शिविरों में बाल बोध प्रथम द्वितीय भक्तामर ईष्टोपदेश, रत्नकरण्ड श्रावकाचार ग्रन्थों का अध्ययन कर अपनी मधुर वाणी से जिनवाणी का रसास्वादन करवाया। सांगानेर संस्थान से पधारे हुए विद्वानों द्वारा सभी विद्यार्थियों की परीक्षा के माध्यम से प्रथम, द्वितीय स्थान का चयन किया। प्रतिदिन प्रातः मंदिरजी में पूजन अभिषेक करने की विधि भी इन छात्रों को सिखाई जाती थी।

श्रमण संस्कृति संस्थान जयपुर द्वारा प्रतिवर्ष संपूर्ण भारतवर्ष में संस्कार शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। समापन के अवसर पर पधारे हुए सभी विद्वानों का युवा महासभा, महिला महासभा, वागड़ स्नातक परिषद द्वारा पगड़ी पहनाकर दुपट्टा उड़ा कर प्रतीक चिह्न से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रत्येक गांव से जो छात्र शिविर में प्रथम एवं द्वितीय स्थान पर आए, उन सभी छात्रों का समाज द्वारा सम्मान किया गया।

अंकेश भैया ने कहा कि संस्कार शिविरों के माध्यम से लौकिक शिक्षा की साथ-साथ धार्मिक शिक्षा भी बहुत जरूरी है। धार्मिक शिक्षा के माध्यम से इन छात्रों को संस्कारित बनाया जा रहा है, जिससे उनकी शिक्षा व जैन धर्म संस्कार संस्कृति को मजबूती प्रदान की जा सके। कार्यक्रम का संचालन अंकेश शास्त्री घाटोल द्वारा किया गया।

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