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शाही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव :  तीर्थंकरों के द्वारा होती है धर्म तीर्थ की स्थापना – मुनि सुधासागर


सारांश

शाही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ शनिवार को हुआ। जिसकी भव्य कलश यात्रा अभिनंदनोदय तीर्थ से निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में निकाली गई। यात्रा में श्रीजी को रजत रथ में विराजित किया गया और श्रावकों ने इसे अपने हाथों से खींचा। पढ़िए राजीव सिंघाई की विस्तृत रिपोर्ट…


ललितपुर। श्री मज्जिनेन्द्र जिनबिम्ब बड़े बाबा अभिनंदानाथ त्रिकाल चौबीसी, रजतमयी चौबीसी, नन्दीश्वर सहस्त्रकूट गुफामय कल्पवृक्ष, मानस्तम्भ, जिनबिम्ब का शाही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ शनिवार को हुआ। महामहोत्सव की भव्य कलश यात्रा अभिनंदनोदय तीर्थ से निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में नगर के प्रमुख मार्गों से निकली, जिसमें भक्त श्रीजी को रथ में विराजित कर अपने हाथों से खींचकर पुण्यार्जन कर रहे थे।

दिव्यघोष के साथ निकली कलश यात्रा
दोपहर में अभिनंदनोदय तीर्थ से प्रारम्भ हुई कलश शोभायात्रा की छटा अपने आप में अनूठी रही, जिसमें दिव्यघोषों की धूम के साथ कई महिला मंडल केसरिया ध्वज पताकाएं लिए हुए आगे-आगे चल रहे थे। प्रतिष्ठा महोत्सव में महापात्र माता-पिता की भूमिका में कल्पना -राजेन्द्र जैन थनवारा, राजदरबार की अनुपम झांकी विशेष वाहन में सुसज्जित रही। हाथी पर ध्वज पताकाएं लिए प्रतिष्ठा महोत्सव के सौधर्म इन्द्र सुमन-स्वतंत्र मोदी, धनकुबेर सुधा-अशोक जैन दैलवारा, महायज्ञनायक रचना-संजीव जैन, सीए सुशोभित रहे। कलश यात्रा में महिलाए जैन ध्वजा के रंग में लाल-पीले, सफेद, हरे रंग के वस्त्रों में अनुशासित चल रही थीं। वायु शुद्धि, जल शुद्धि, मांगलिक द्रव्य क्षेपण, रंगोली क्षेपण करते हुए महिलाओं के समूह जहां शोभायात्रा में आकर्षण के केन्द्र रहे, वहीं उनके पीछे पीछे छत्री टीम, भक्तामर महिला मण्डल, प्रतिभाशाली पेरेंट्स समूह धूप घट में समर्पित करते हुए चल रही थी। सोलह सलाखा बच्चे गुलदस्ता टीम ग्रुप के साथ और उनके पीछे-पीछे चल रहे थे।

झांकियों ने मोहा मन

शोभायात्रा में पांच पापों की झांकी, विद्या गुरू मण्डल का गरबा, छह ऋतुओं के पेड़, डम्बल नृत्य नीली श्राविका मण्डल पाठशाला के बच्चों का प्रदर्शन, जोशाना समैया मण्डल, पाठशाला की वाहिनियों का प्रदर्शन, वर्द्धमान महिला संभाग, घूमर बालिका मण्डल के साथ दयोदय म्यूजिकल ग्रुप एवं दिव्यघोष के स्व्यंसेवक मंगल गान कर रहे थे। इन्द्र-इन्द्राणियों के उपरान्त 32 चंवर लेकर श्रावक चल रहे थे। शोभायात्रा में श्रीजी को रथ में विराजित कर इन्द्रगण शामिल थे। शोभायात्रा वर्णी चौराहा से होते हुए तुवन मंदिर चौराहा, सदरकांटा से निकली, जिसमें आगे आगे तमिल लुंगी टीम के नवयुवक अपना प्रदर्शन कर रहे थे।

मुनि संघ का रहा सानिध्य

शोभायात्रा में रजत रथ में श्रीजी को विराजित कर श्रावक अपने हाथों से रथ खींच रहे थे। उसके आगे-आगे मुनि सुधासागर महाराज अपने संघस्थ मुनि पूज्यसागर महाराज, एलक धैर्यसागर महाराज, क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज के साथ श्रावकों को आशीर्वाद प्रदान कर रहे थे। प्रतिष्ठा महोत्सव में यज्ञनायक एवं अन्य प्रमुख पात्र विशेष वाहन बग्घियों में शोभायात्रा में चल रहे थे। शोभायात्रा सदर कांटे से इलाइट चौराहा से होते हुए पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजन स्थल अयोध्यापुरी पहुची। दो किमी लम्बी सुसज्जित शोभयात्रा को देखने के लिए श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। मित्र मण्डल बडा मंदिर ने खुशी में मिष्ठान का वितरण किया, वहीं मार्ग में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर मुनि श्री से आशीर्वाद ग्रहण किया। अयोध्यापुरी में मंगल कलश यात्रा की अगुवाई जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, प्रबंधक मोदी पंकज जैन पार्षद, कोमलचंद दादा, कमलेश जैन चौधरी, आकाश जैन भारत गैस, अविनाश सिंघई, जीवन जैन मिर्चवारा, जितेन्द्र जैन मुच्छड, मेला कैप्टन निर्देशक नरेन्द्र कडंकी, नरेन्द्र जैन छोटे पहलवान, कैप्टन राजकुमार जैन, पार्षद महेन्द्र सिंघई, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, मनोज जैन बबीना ने मुनि श्री का पादप्रक्षालन कर अगुवाई की। सायंकाल अयोध्यापुरी से मुनि श्री सुधासागर महाराज ने श्रावकों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। इसके बाद आचार्य भक्ति एवं महाआरती का आयोजन हुआ।

मुनि श्री ने बताई धर्म की महिमा

इसके पूर्व प्रातःकाल अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र में मंगलाष्टक दिग्बंधन, रक्षामंत्र शान्तिमंत्र यंत्राभिषेक घटयात्रा पूजा हुई। धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज ने धर्म की महिमा बताते हुए कहा कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के माध्यम से जीवन में जहां परिणामों में विशुद्धि बढ़ती है, वहीं आत्मा पवित्र और निर्मल होती है। पंचकल्याणक में तीर्थंकर के पांचों कल्याणकों को स्वर्ग से सौधर्म इन्द्र आकर मनाते हैं। एक सामान्य मां भी धन्य हो जाती है। जब वह पंचकल्याणक में तीर्थंकर की मां बनती है तो वह सर्ववंदनीय हो जाती है। मुनि श्री ने कहा कि जैन धर्म अनादि काल से है। हर तीर्थंकर अपने-अपने समय में धर्म तीर्थ की स्थापना करते हैं। तीर्थंकर ऐसी आत्मा होती है, जो तीनों लोकों में सभी के सुख की भावना और कल्याण की भावना करती है। आज उन्हीं तीर्थकरों के कल्याणकों को मना रहे हैं। धर्मसभा का संचालन महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया ने किया।

पिच्छिका परिवर्तन रविवार को

निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज ससंघ का भव्य पिच्छिका परिवर्तन 29 जनवरी को दोपहर एक बजे शाही पंचकलयाणक प्रतिष्ठा महोत्सव अयोध्यापुरी में जैन पंचायत ललितपुर के तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा। संयम के महोत्सव में निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज नगर गौरव पूज्यसागर महाराज, एलक धैर्यसागर महाराज, क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज को संयमी श्रावक नवीन पिच्छिका प्रदान कर पुरानी पिच्छिका ग्रहण करेंगे। पिच्छिका महोत्सव को दिगंबर जैन युवा वर्ग अशोकनगर द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुति किए जाएंगे। इस अवसर पर श्रावक-श्रेष्ठियों का सम्मान होगा।

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