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अंबाह में गूंजे भक्ति स्वर, सम्पन्न हुआ शांतिनाथ महामंडल विधान : प्रवचन में मिला संयम, क्षमा और शांति का संदेश


अंबाह स्थित श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर में स्व. जमुना प्रसाद जैन और स्व. मुन्नीबाई जैन (बिचपरी) परिवार द्वारा आयोजित श्री 1008 शांतिनाथ महामंडल विधान में भक्तिभाव का अद्भुत वातावरण रहा। प्रतिष्ठाचार्य पंडित मनोज शास्त्री के प्रवचन ने संयम, क्षमा और शांति का संदेश दिया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…


अंबाह नगर के परेड़ चौराहा स्थित श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर में रविवार को भव्य श्री 1008 शांतिनाथ महामंडल विधान का आयोजन हुआ। यह विधान स्व. जमुना प्रसाद जैन एवं स्व. मुन्नीबाई जैन (बिचपरी वालों) के परिजनों द्वारा विश्व शांति और जनकल्याण की भावना से कराया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

सुबह 7 बजे से अभिषेक और शांतिधारा का शुभारंभ हुआ, जिसमें भक्तों ने भगवान पार्श्वनाथ का शुद्ध जल से अभिषेक कर मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की। इसके बाद संगीतमय विधान प्रारंभ हुआ, जिसका संचालन प्रतिष्ठाचार्य पंडित मनोज शास्त्री ने विधिपूर्वक मंत्रोच्चार के साथ किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रत्येक मंडल के महत्व और धार्मिक लाभों को समझाया।

भजनों की धुन पर झूम उठे, परिसर भक्ति रस से सराबोर

सौरव एंड पार्टी (मुरैना) द्वारा प्रस्तुत भक्ति संगीत ने माहौल को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। श्रद्धालु भजनों की धुन पर झूम उठे और पूरा परिसर भक्ति रस से सराबोर हो गया। प्रवचन में पंडित मनोज शास्त्री ने कहा कि भगवान शांतिनाथ का जीवन संयम, क्षमा और करुणा का प्रतीक है। सांसारिक सुख क्षणिक हैं, लेकिन आत्मकल्याण और धार्मिक भक्ति ही स्थायी शांति का मार्ग है। उन्होंने बताया कि शांतिनाथ महामंडल विधान आत्मा और परमात्मा के बीच का पुल है, जो व्यक्ति को अपने वास्तविक स्वरूप का बोध कराता है।

उन्होंने यह भी कहा कि क्रोध, अहंकार और लोभ को त्यागकर यदि जीव करुणा और मैत्री भाव अपनाए तो परिवार और समाज में शांति का वातावरण बन सकता है। इस दौरान उन्होंने स्व. जमुना प्रसाद जैन के धर्मनिष्ठ जीवन को स्मरण करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बताया। कार्यक्रम का संचालन मुख्य आयोजक सतीश चंद जैन और संजय कुमार जैन (बिचपरी वाले) ने किया। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। श्रद्धालुओं के लिए भोजन और प्रसादी की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई। विधान का समापन सामूहिक शांति पाठ और भगवान शांतिनाथ की आरती के साथ हुआ। सभी ने प्रार्थना की कि समाज में शांति, सद्भाव और भक्ति की भावना सदा बनी रहे।

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