आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। मुरैना जिले के अंबाह तहसील के अंतर्गत सिहोनिया गांव में 11वीं शताब्दी की बनी भगवान शांतिनाथजी (16 फीट), भगवान अरहनाथ जी (10 फीट), भगवान कुंथुनाथजी (10 फीट) की खड्गासन पत्थर की मूर्तियां यहां स्थापित हैं। इनके भी संरक्षण की आवश्यकता है। पढ़िए मनोज नायक की यह विशेष रिपोर्ट…
अम्बाह। आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत से ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। जिस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। सौरभ जैन वरेह वाले अंबाह वाले के मुताबिक मुरैना जिले के अंबाह तहसील के अंतर्गत सिहोनिया गांव में 11वीं शताब्दी की बनी भगवान शांतिनाथजी (16 फीट), भगवान अरहनाथ जी (10 फीट), भगवान कुंथुनाथजी (10 फीट) की खड्गासन पत्थर की मूर्तियां यहां स्थापित हैं। ये मूर्तियां ब्रह्मचारी गुमानी लाल के स्वप्न में आती थीं। तब उन्होंने यहां खुदाई कराई और अतिशय कारी प्रतिमा प्राप्त हुई। आज वर्तमान में भी गांवों में खुदाई के दौरान मूर्तियां प्राप्त होती रहती हैं। मंदिर में ऐसी मूर्तियों के लिए विशेष संग्रहालय है। हाल ही में पता चला कि चतुर्थ काल में 14 मंदिर थे। इसके अलावा खजुराहो पैटर्न पर बने शिव हनुमान दुर्गा के ककनमठ मंदिर भी हैं। 9 जुलाई 2006 को खुदाई के दौरान शिव मंदिर में जैन मूर्ति मिली थी। वार्षिक मेला क्वार वादी दोज और जेठ वादी 14 निर्वाण दिवस पर लगता है। समवशरण और चौबीसी का भव्य मंदिर है। जबकि मानस्तंभ का निर्माण कार्य प्रगति पर है। नया कमल के आकार का मंदिर बन के तैयार हो चुका है, जो जल्द ही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा होने के बाद दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा। मंदिरों की संख्या: 05 है। बड़ी धर्मशाला, भोजनशाला है। जहां पर पूजा विधान करने और रुकने की उचित व्यवस्था है।
इसलिए मनाया जाता है विश्व विरासत दिवस
विश्व विरासत दिवस को मनाने का उद्देश्य ग्रह पर सांस्कृतिक विरासत और विविधता के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है। दुनिया भर में कई ऐसे ऐतिहासिक धरोहरें हैं, जो सालों से अपने अंदर न जाने कितने किस्से और कहानियों को संजोए हुए हैं। इन स्मारकों और स्थलों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। ऐसी विरासतों को संभाले रखने के लिए ही विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है। हर साल 18 अप्रैल को आयोजित होने वाला यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षण है। दुनिया भर में इस दिन को स्मारकों और विरासत स्थलों की यात्रा करके, सम्मेलनों में शामिल होकर, राउंड टेबल और समाचार पत्रों के लेखों समेत कई अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। यह दिन पहली बार 1983 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा मनाया गया था। यूनेस्को के 22वें आम सम्मेलन के दौरान इसे विश्व आयोजन के रूप में मान्यता मिली थी। भारत में कुल 3691 ऐसे स्मारक और स्थल हैं, जिसमें से 40 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के रूप में नामित हैं। इसमें ताजमहल, अजंता की गुफाएं और एलोरा की गुफाएं शामिल हैं। विश्व धरोहर स्थलों में असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्राकृतिक स्थल भी शामिल हैं।













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