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शनि जयंती एवम वट सावित्री व्रत 6 जून को शनि की महादशा, अंतर्दशा, साढ़ेसाती आदि से परेशान हैं तो शनि जयंती और वट सावित्री व्रत के दिन ये उपाय करें


शनि जयंती एवम वट सावित्री व्रत गुरुवार 6 जून को मनाया जायेगा। महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु की कामना करेंगी। शनि की चाल में बदलाव होता है, तो कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या शुरू होती है तो कुछ राशियों पर से समाप्त होती है। वहीं जिन लोगों पर साढ़ेसाती और ढैय्या चलती है, उन लोगों को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।


मुरैना। शनि जयंती एवम वट सावित्री व्रत गुरुवार 6 जून को मनाया जायेगा।सभी ग्रहों में शनि ग्रह का नाम कौन नहीं जानता। शनि देव को न्याय प्रदाता और कर्मफल दाता माना गया है। शनि देव व्यक्ति को कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं इनकी दृष्टि यानी कुंडली में शुभ है तो व्यक्ति को रंक से राजा बनाने में देर नहीं करते और अशुभ हो तो राजा से रंक भी बना देते है।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने कहा कि जब भी शनि की चाल में बदलाव होता है, तो कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या शुरू होती है तो कुछ राशियों पर से समाप्त होती है। वहीं जिन लोगों पर साढ़ेसाती और ढैय्या चलती है, उन लोगों को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

इस समय कर्क और वृश्चिक राशि वालो पर शनि की ढैया और मकर, कुंभ, मीन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है।

जैन ने कहा शनि जयंती और वट सावित्री व्रत दोनो हो 06 जून गुरुवार को है।

अगर आप भी शनि की महादशा , अंतर्दशा, साढ़ेसाती आदि से परेशान हैं तो शनि जयंती और वट सावित्री व्रत के दिन ये उपाय कर सकते हैं। जिससे आपको शनि दोष से मुक्ति मिल सकती है।

पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को शनि जयंती और वट सावित्री का व्रत रखा जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन सुहागिन महिलाएं वट यानी बरगद के पेड़ की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ कच्चा सूत या फिर सफेद धागा बांधती है। इस साल शनि जयंती और वट सावित्री व्रत 6 जून गुरुवार को रखा जा रहा है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि 05 जून की शाम को 07 बजकर 54 मिनट से 6 जून को शाम 06 बजकर 07 मिनट तक रहेगी।

शनि को प्रसन्न करने करे ये उपाय

इस दिन व्रत रखें, सरसों के तेल का दीपक शनि देव के मंदिर पर और पीपल के पेड़ के नीचे रखे। काले तिल, कपड़ा, छाता, लोहा, काले उड़द, देशी चना से बनी वस्तुओं का दान करे। शनि स्त्रोत एवम शनि मंत्र का जाप करें।

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