विशिष्ट राम कथाकार मुनि श्री जय कीर्ति जी रामपुरा में विराजमान हैं। रामपुरा स्थित अकलंक स्कूल परिसर में 30 नवंबर तक पद्म पुराण पर आधारित श्री रामकथा का भव्य आयोजन चल रहा है। राम कथा के तृतीय दिवस के मुखारबिंद से मधुर संगीत और ध्वनि से श्रद्धालुगण मंत्र मुग्ध कर श्रद्धा और भक्ति से झूमने लगे। कोटा से पढ़िए, यह खबर…
कोटा। विशिष्ट राम कथाकार मुनि श्री जय कीर्ति जी रामपुरा में विराजमान हैं। रामपुरा स्थित अकलंक स्कूल परिसर में 30 नवंबर तक पद्म पुराण पर आधारित श्री रामकथा का भव्य आयोजन चल रहा है। राम कथा के तृतीय दिवस के मुखारबिंद से मधुर संगीत और ध्वनि से श्रद्धालुगण मंत्र मुग्ध कर श्रद्धा और भक्ति से झूमने लगे। मुनि श्री जय कीर्ति ने धर्म सभा में कई नीतियां बतलाई। जैसे जो देव शास्त्र गुरु के समक्ष भक्ति से नाचते हैं। उन्हें संसार के सामने नहीं नाचना पड़ता है। धन वही जो धर्म के साथ रहता है, धन वह नहीं है जो धर्म को छोड़कर रहता है। वह धन मिट्टी के बराबर है जो धर्म से रहित है और धन थोड़ा हो या अधिक हो वह धर्म के साथ है तो सोने से भी क़ीमती है। गुरु की किसी भी विद्या अथवा कला को सीखने के लिए उस विद्या उस विद्या एवं कला में अंदर तक डूबना पड़ता है, तल्लीन होना पड़ता है। तभी वह विद्या और कला प्राप्त होती है।
धर्मों रक्षते रक्षतः यतो धर्मों स्ततो जय
संसार में सभी अवसर कई बार मिल सकते हैं लेकिन, साधु सेवा का अवसर जो तन मन धन और भावों को समर्पित करके अवसर हासिल किया जाता है। उस अवसर की तुलना इस संसार में और कई नहीं जितने विश्वास के साथ साधु की सेवा की जाती है। उतना ही फल सेवा का प्राप्त होता है। जितना समर्पण साधु के प्रति किया जाता है। उतनी ही कृपा साधु की प्राप्त होती है। मुनिश्री का पाद प्रक्षालन अकलंक संस्थान के अध्यक्ष पीयूष बज एवं समस्त स्टाफ के सदस्यों ने किया।
इन्होंने किया दीप प्रज्वलन
महेश गंगवाल ने बताया कि इस अवसर पर कोटा व्यापार महासंघ अध्यक्ष क्रांति जैन, भागचंद लुहाड़िया, नवीन लुहाड़िया, पदम टोंग्या, चांदमल गंगवाल, पारस जैन “पार्श्वमणि” रविन्द्र बाकलीवाल, जवाहर जैन, सुरेश सामरिया, महावीर ठग आदि श्रेष्ठीजनों ने दीप प्रज्वलन किया। राकेश जैन चपलमन ने बताया कि रविवार को मां जिनवाणी को पालकी में रख कर मुनि श्री को भेंट करने का सौभाग्य विमलचंद, मनोज साधना , पीयूष पिंकी, शोभित प्रीति, नुवान सरपटिया (मूवासवाला) विजयपाडा परिवारजन को प्राप्त हुआ। राजा श्रेणिक के रूप में पद्मकुमार विद्युलता, राहुल सोना, अनन्य, ग्रंथ गुलाबवाडी ने प्रश्न पूछा। पीयूष बज ने बताया कि सबसे पहले मंगलाचरण पाठ मैना, साधना, मीना गंगवाल ने किया।
जैन धर्म की महानता के भाव पूर्ण प्रसंग सुनाए
मुनि श्री जय कीर्ति जी महाराज ने जैन धर्म की महानता के अद्भुत भाव पूर्ण प्रसंग सुनाए। राम लक्ष्मण सीता आगे बढ़ते हुए कपिल ब्राह्मण के घर पहुंचे। कपिल ब्राह्मण द्वारा उनका अपमान करके घर से निकलना, फिर एक वृक्ष के विश्राम करते हुए देखकर यक्ष द्वारा सुंदर नगरी का निर्माण करना, इसके बाद कपिल ब्राह्मण को वन में जाना, भव्य नगर देखकर आश्चर्य चकित होने के प्रसंग सुनाए। मुनिराज से धर्मोपदेश सुनने के बाद पूरा जीवन ही परिवर्तित हो गया और उसने अपनी पत्नी को भी सारे उपदेश सुनाएं और दोनों ने अणुव्रत को अंगीकार किया और फिर प्रभु श्री राम से मिलने के बाद उनकी दरिद्रता दूर हो गई। बहुत पश्चाताप होने के बाद में उन्होंने “अरिहंत नाम के रसायन” को प्राप्त करके “जिनदीक्षा ” लेने का निर्णय किया और जिन शासन के पथ पर आरूढ़ होकर अपने जीवन को धन्य कर लिया और उधर, लक्ष्मण का विवाह वरमाला के साथ में हुआ। भरत के निर्बाध राज्य को बाधा उत्पन्न करने के इच्छुक अतिवीर्य राजा से राम लक्ष्मण का युद्ध, युद्ध में पराजित अतिवीर्य राजा को संसार से वैराग्य हुआ। जिससे उसने निर्ग्रंथ पद धारण कर लिया।
ऋद्धि मुनिराज को नवादा भक्ति पूर्वक आहार दिया
राम लक्ष्मण सीता आगे बढ़ते हुए वंशधर पर्वत पहुँच गये वहां द्वय मुनिराज को ध्यानमय देखा द्वय मुनिराज के ऊपर आए उपसर्ग को दूर किया जिससे द्वय मुनिराज को केवल ज्ञान हो गया उन केवलज्ञानी देशभूषण कुलभूषण मुनिराज की वंदना करके वहां से प्रस्थान किया।तत् पश्चात एक नदी के किनारे पहुंचे वहां सीता ने उत्तमोतम द्रव्यों से भोजन बनाया एवं गुप्ति सुगुप्ति नामक दो चारण ऋद्धि मुनिराज को नवादा भक्ति पूर्वक आहार दिया वही एक कुरूप गिद्ध पक्षी (जटायु) ने द्वय मुनिराज के चरणोदक सेवन से उसका शरीर रत्नमय सुंदर बन गया और जटायु को जाति स्मरण हो जाने से बहुत पश्चाताप हुआ और उसने मुनिराज से पूर्व भव का वृतांत सुनकर अणुव्रत धारण किए। अपने जीवन में चाहे कितना भी धन ऐश्वर्य वैभव क्यों न हो लेकिन, जिन शासन से बड़ी संसार की कोई विभूति नहीं है। जिन धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है और हमारे मुनिराज जो प्राणी मात्र का कल्याण करते हैं। उनसे दयालु और कोई नहीं प्रभु श्री राम भी आगे बढ़ते-बढ़ते अनेक जीवों का कल्याण करते हुए अनेक साधु भगवंत का उपसर्ग दूर करते हुए अतिशय पुण्य कमाते हुए आगे बढ़ रहे हैं।पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार ने बताया कि जीवन जो जीवंत करने के लिए अवश्य श्री राम कथा सुने और आत्मसात करें अपने जीवन को धर्ममय करें और मोक्ष मार्ग की और आगे बढ़े।













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