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सर्वतोभद्र सर्वार्थसिद्धि धर्मयोग कलश स्थापना संपन्न चातुर्मास का स्वर्णिम: अवसर श्रमण व श्रावक‌ के लिए उपयोगी – योगभूषण महाराज 


। त्रिलोक तीर्थ प्रणेता, समाधि सम्राट, पंचम पट्टाचार्य परम पूज्य गुरुवर आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज के अंतिम दीक्षित शिष्य परम श्रद्धेय मंत्र महर्षि (डॉ.) क्षुल्लक श्री योगभूषण जी महाराज का 14वां सर्वतोभद्र सर्वार्थसिद्धि धर्मयोग (चातुर्मास) स्थापना समारोह बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ राजधानी दिल्ली के गोल मार्केट स्थित मुक्ताधारा ऑडिटोरियम में सानंद संपन्न हुआ। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


नई दिल्ली। त्रिलोक तीर्थ प्रणेता, समाधि सम्राट, पंचम पट्टाचार्य परम पूज्य गुरुवर आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज के अंतिम दीक्षित शिष्य परम श्रद्धेय मंत्र महर्षि (डॉ.) क्षुल्लक श्री योगभूषण जी महाराज का 14वां सर्वतोभद्र सर्वार्थसिद्धि धर्मयोग (चातुर्मास) स्थापना समारोह बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ राजधानी दिल्ली के गोल मार्केट स्थित मुक्ताधारा ऑडिटोरियम में सानंद संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर दिल्ली-एनसीआर से समाजश्रेष्ठी, गुरुभक्त व गणमान्य महानुभाव ने सम्मिलित होकर समारोह को गौरवशाली बनाया।

योगांचल परिसर (ग्रेटर नॉएडा) में आयोजित होने वाले इस भव्य चातुर्मास का मुख्य पुण्यार्जन संघपति श्री पीयूष रविंद्र खडकपुरकर, देवलगांवराजा (महाराष्ट्र) को प्राप्त हुआ। समारोह के मध्य फाउंडर ट्रस्टी दीपक जैन (विवेकानंदपुरी) के द्वारा सभी ट्रस्टियों व आगंतुक अतिथियों का सम्मान किया गया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए क्षुल्लक योगभूषण महाराज ने‌‌ कहा कि चातुर्मास का यह स्वर्णिम अवसर श्रमण व श्रावक‌ के लिए उपयोगी होता है। हम सभी इस अवसर को‌ना गंवाए और अपनी आध्यात्मिक उन्नति प्रशस्त करें। कार्यक्रम का संचालन ब्र. योगांशी दीदी के कुशल नेतृत्व में संपन्न हुआ जिन्होंने अपनी अद्वितीय क्षमता से कार्यक्रम को सजीव और स्मरणीय बनाया।

धर्मयोगी फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य समारोह के विशेष आकर्षण में मंत्र उच्चारण और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल थे जिसने उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर कर किया।

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