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दमदम कोलकाता के संजय जैन सेठी ने 16 उपवास की साधना पूर्ण : आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी के सानिध्य में किया पारणा 


आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में नगर में अनेक तपस्या हुईं। यहां तक कि बाहर से आए भक्तों ने भी तप आराधना की। इसी कड़ी में दमदम कोलकाता निवासी 60 वर्षीय संजय जैन सेठी ने 16 उपवास की तप साधना पूर्ण की। रामगंजमंडी से पढ़िए, यह खबर…


रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में नगर में अनेक तपस्या हुईं। यहां तक कि बाहर से आए भक्तों ने भी तप आराधना की। इसी कड़ी में दमदम कोलकाता निवासी 60 वर्षीय संजय जैन सेठी ने 16 उपवास की तप साधना पूर्ण की। विगत एक माह से निरंतर गुरु चरणों में रहकर तन-मन-धन समर्पित करते हुए यह साधना पूर्ण की। इससे पूर्व वर्ष 2024 में उन्होंने आचार्य श्री के कोलकाता के प्रवास के दौरान दसलक्षण पर्व पर 10 उपवास की साधना पूर्ण की। उसके बाद ही उन्होंने मन बना लिया था, जहां भी आचार्य श्री रहेंगे, वहां रहकर 16 उपवास की साधना करूंगा।

 आचार्य श्री के सानिध्य कठिन साधना भी लगी रूई जैसी 

सेठी ने कहा कि संरक्षक अजीत सेठी, अध्यक्ष दिलीप विनायका, उपाध्यक्ष चेतन बागड़िया, उपाध्यक्ष कमल लुहाड़िया, महामंत्री राजकुमार गंगवाल, मंत्री राजीव बाकलीवाल एवं सभी समाज बंधुओं और मेरी बहन-बहनोई सारिका मनोज चांदवाड ने मुझे पूरा सहयोग किया। सेठी अपनी धर्मपत्नी शोभा सेठी के सहयोग से यह तप आराधना की। तप आराधना पूर्ण होने के बाद सेठी ने तप आराधना के विषय में आचार्य श्री के आशीर्वाद को सर्वाेपरि मानते हुए कहा कि धर्म हमारी आत्मा को पावन-निर्मल बनाता है।

एक अलौकिक अनुभूति का अहसास 

16 कारण पर्व धर्म का एक उत्कृष्ट रूप है। उन्होंने कहा कि मैं आचार्य श्री की तप साधना की प्रेरणा और आशीर्वाद से यह तपस्या निर्विघ्न पूर्ण कर पाया। इस तप साधना के दौरान मुझे एक अलग तरह की उर्जा और एक अलौकिक अनुभूति हुई। जिसे शब्दों में वर्णन कर पाना असीमित है। आचार्य श्री के सानिध्य में 16 उपवास जैसी कठिन साधना में मुझे रूई जैसी हल्की प्रतीत हुई।

सभी का आभार जताया 

बिना किसी आकुलता के आनंद के साथ पूरे व्रत धर्मध्यान पूर्वक संपूर्ण हुए सुबह से ध्यान, अभिषेक, शांतिधारा, आहार देना, तत्त्वार्थसूत्र, प्रतिक्रमण ये सारी दिनचर्या मेरे जीवन का सबसे अनमोल समय था। जो मेरे लिए अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री और संपूर्ण संघ का ही मेरे ऊपर आशीर्वाद और वात्सल्य रहा। साथ ही ब्रह्मचारी भैयाजी और ब्रह्मचारी दीदियों के साथ रामगंजमंडी के प्रत्येक जन ने मेरा संबल बढ़ाया और जिसका मैं शब्दों रूपी सुमन से आभार प्रेषित करता हूं।

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