
अशोक जेतावत | धरियावद नगर गौरव दिगंबर जैन मुनि श्रेयस सागरजी महाराज का गत 18 दिसंबर रविवार को बोलीं जिला सवाई माधोपुर, राजस्थान में सम्यक समाधिपूर्वक मरण हो गया था । सभा की शुरुआत में प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जैन ने उप जिला प्रमुख सागरमल बोहरा, समाज सेठ दिनेश कुमार जैकणावत, मुनिश्री के गृहस्थ पुत्र सुनील भोपावत एवं अन्य रिश्तेदारों ने दीप प्रज्वलन किया ।
विनयांजलि सभा में मुनिश्री श्रेयस सागरजी महाराज के गृहस्थ जीवन से लगाकर मुनि दीक्षा एवं समाधिमरण तक के संस्मरणों को सुनाते हुए महाराज के गुणों का अनुवाद किया ।
श्रेयस सागर जी का जीवन प्रेरणादायी
साथ ही उनके मुनि चर्या के समय समस्त समाजजन को दिए नियम, संयम, व्रतों के उपदेश का पालन करते हुए अपने जीवन को धर्म मार्ग पर ले जाने का उपकार माना। मुनिश्री सरल स्वभावी, वात्सल्य के धनी और अपनी साधना में अडिग थे । अपने जीवन का अंतिम समय मानकर बार-बार आचार्यश्री को अपने समाधिमरण के नियम दिलाने का आग्रह करते रहे और सावधानीपूर्वक इस नश्वर देह को त्यागकर स्वर्गारोहण किया ।
उनका जीवन समाज के सभी लोगों के लिए प्रेरणास्पद है। वे सर्वसमाज के दर्शनार्थियों को अपने जीवन में धर्म मार्ग पर चलने के लिए छोटे-छोटे नियम देते रहते थे। उन्होंने हजारों लोगों को धर्म मार्ग पर लगाया। इनके इस उपकार को जीवनभर नहीं भुलाया जा सकता है। सभी नगरवासियों को मुनिश्री की दीक्षा के पश्चात नगर आगमन नहीं होने का ताऊम्र मलाल रहेगा।

विनयांजलि कार्यक्रम में गणमान्य लोग रहे उपस्थित
विनयांजलि सभा को उप जिला प्रमुख सागरमल बोहरा, पंडित विशाल जैन, शांतिलाल लुणदिया (भींडर), सुमतिलाल रत्नावत (उदयपुर), अशोक कुमार जेतावत, सूर्यप्रकाश बोहरा, सुरेश पचोरी, जसवंत कोठारी, हरिसिंह कोठारी, दिनेश मेहता, राकेश किकावत, दिलीप जेतावत, महेंद्र चंपावत, निरंजन दरंगा, प्रकाश वणावत, पुष्करराज जैन, अनिता वणावत, सुनील भोपावत अन्य लोगों समेत प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जैन ने जैनागम अनुसार जैन मुनि की दीक्षा से लेकर चर्या पर विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए अपनी विनयांजलि अर्पित की।
सभा के अंत में सभी ने खड़े होकर मौनपूर्वक 9 बार णमोकार महामंत्र का उच्चारण करते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।













