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समाधिमरण : मुनि 108 श्री श्रेयस सागर महाराज का समाधिमरण

धरियावद (अशोक जेतावत)। दिगम्बर जैन आचार्य वात्सल्य वारिधि आचार्य 108 श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज से दीक्षित एवं उनके संघस्थ धरियावद नगर गौरव मुनि 108 श्री श्रेयस सागर जी महाराज का 18 दिसंबर को ब्रह्म बेला में 4.10 बजे राजस्थान के सवाई माधोपुर के बौलीं समाधिमरण हो गया।

मुनि श्री का आचार्य वर्द्धमान सागर जी के संघस्थ रहकर अभी अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी से किशनगढ़ में आगामी जनवरी माह में श्रीमद जिनेन्द्र भव्य पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में सान्निध्य प्रदान करने के लिए पैदल मंगल विहार चल रहा था।

मुनि 108 श्री श्रेयस सागर महाराज के समाधिमरण धर्म और समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। मुनि श्री श्रेयस सागर जी महाराज की दिगम्बर जैनेश्वरी दीक्षा निमाज जिला पाली में सम्पन्न हुई थी।

पति-पत्नी दोनों मोक्ष मार्ग गामी
वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दीक्षित शिष्य मुनि श्री श्रेयस सागर जी का जन्म धरियावद निवासी श्रीमती बाबरी देवी-श्री मोतीलाल जी के यहां जन्म 15 अगस्त,1954 को हुआ।

इनका लौकिक नाम महावीर था। आपने वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से 20 फरवरी, 2015 को निमाज में सीधे मुनि दीक्षा ली। जिसके बाद आपका नामकरण मुनि श्री श्रेयस सागर जी हुआ।

उल्लेखनीय है कि आपकी गृहस्थ अवस्था की पत्नी भी वर्ष 2016 में सिद्धवरकुट में आचार्य श्री से आर्यिका दीक्षा लेकर आर्यिका श्री श्रेयमति माताजी बनीं। आपकी भी समाधि वर्ष 2020 बेलगांव में हो चुकी है। यह जानकारी वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार के राजेश पंचोलिया ने दी।

 

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