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भव्यछपक आसन्न सागर की हुई समाधि : पूरे मुनिसंघ ने उनकी सल्लेखना समाधि में धर्म आराधना कराई।


आर्यिका दृढमतिमाताजी, ब्र. सविता दीदी और ब्र. अनीता दीदी के गृहस्थ जीवन के पिता 94 वर्षीय गुलाबचंद जैन पटना वालों की भाग्योदय तीर्थ के संत भवन में 26 दिन की सल्लेखना के बाद समाधि पूर्वक मरण हो गया। पढ़िए एक रिपोर्ट…


सागर। आर्यिका दृढमतिमाताजी, ब्र. सविता दीदी और ब्र. अनीता दीदी के गृहस्थ जीवन के पिता 94 वर्षीय गुलाबचंद जैन पटना वालों की भाग्योदय तीर्थ के संत भवन में 26 दिन की सल्लेखना के बाद समाधि पूर्वक मरण हो गया। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के आशीर्वाद से 30 जुलाई को मुनि श्री अजितसागर महाराज ने 10 प्रतिमाओं के व्रत दिए थे। उनका नाम परिवर्तन कर भव्यछपक आसन्न सागर रखा गया था।

मुकेश जैन ढाना ने बताया कि 14 जुलाई से उनकी सल्लेखना चल रही थी। सिर्फ दो गिलास जल लेकर के धर्म ध्यान किया। 7 अगस्त को सुबह से उन्होंने स्वयं जल का भी त्याग कर दिया। पूरे मुनिसंघ ने उनकी सल्लेखना समाधि में धर्म आराधना कराई। उनकी पत्नी सुशीला बाई 90 वर्ष की है। तीन भाई अशोक जैन, विनोद जैन और प्रमोद जैन है।

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