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स्मृति शेष : संजय जैन मैक्स का डोंगरगढ़ में हुआ समाधि मरण


इंजीनियर संजय जैन मैक्स संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के पिछले 40 वर्षों से विश्वासपात्र हनुमान जैसे समर्पित भक्त थे और आचार्य श्री की प्रेरणा से कुंडलपुर, नेमावर, रामटेक, रेवती रेंज इंदौर आदि स्थानों पर जहां-जहां भी मंदिरों और तीर्थों का निर्माण हो रहा है अथवा हुआ है, उन सभी स्थानों पर आचार्य श्री के निर्देशानुसार संपूर्ण निर्माण कार्य पूरे मन और समर्पण से संजय जैन ने अपने निर्देशन एवं सुपरविजन में करवाया है और करवा रहे थे। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की यह विशेष रिपोर्ट


इंदौर। आचार्य विद्यासागर जी महाराज के अनन्य भक्त एवं सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र नेमावर के अध्यक्ष संजय जैन मैक्स का 59 वर्ष की आयु में रविवार रात को डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरी तीर्थ पर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में समता पूर्वक समाधि मरण हो गया। आप पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ थे। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को डोंगरगढ़ में किया गया। इस अवसर पर उनके परिजन एवं स्थानीय समाज जन भारी संख्या में उपस्थित थे।

जैन के निधन पर राजकुमार पाटोदी, राकेश विनायका, नरेंद्र पप्पाजी, राजेश लारेल, हंसमुख गांधी, राजीव जैन बंटी, डॉक्टर जैनेंद्र जैन, संजीव जैन संजीवनी राजेश जैन दद्दू ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इसे समाज की अपूरणीय क्षति बताया।

आचार्य श्री के हनुमान जैसे विश्वसनीय भक्त थे

इंजीनियर संजय जैन मैक्स संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के पिछले 40 वर्षों से विश्वासपात्र हनुमान जैसे समर्पित भक्त थे और आचार्य श्री की प्रेरणा से कुंडलपुर, नेमावर, रामटेक, रेवती रेंज इंदौर आदि स्थानों पर जहां-जहां भी मंदिरों और तीर्थों का निर्माण हो रहा है अथवा हुआ है, उन सभी स्थानों पर आचार्य श्री के निर्देशानुसार संपूर्ण निर्माण कार्य पूरे मन और समर्पण से संजय जैन ने अपने निर्देशन एवं सुपरविजन में करवाया है और करवा रहे थे। जैन संयम-नियम के साथ जीवन व्यतीत करने वाले धार्मिक व्यक्ति थे और इसी कारण लगता है कि अस्वस्थता के चलते उन्हें अपनी मृत्यु का पूर्वानुमान हो गया था। अतः 15 दिवस पूर्व ही वह परिवार सहित आचार्य श्री के सानिध्य में पहुंचकर उनके ससंघ आशीर्वाद से अपनी मृत्यु को मांगलिक बनाने की साधना कर रहे थे। वह बहुत सौभाग्यशाली रहे कि उन्हें जीवन के अंतिम समय में संस्कृति के महामहिम संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी का संबोधन एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

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