आत्मा का घर मोक्ष है। हम मेले में भटके प्राणी जैसे हैं। हमें कोई बताने वाला भी नहीं हैं कि हमें घर का रास्ता भी बता दे। ये विचार जैन साध्वी गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने चम्पाबाग जैन धर्मशाला ग्वालियर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…
ग्वालियर। भव-भव में भटकने का कारण भाव है। भव-भव की भटकन दूर करने के लिए भाव चाहिए। अनन्तकाल से क्या कर रहे थे? जिसका अपना मकान न हो, वह किराए के मकान में रहता है। जब तक मकान मालिक चाहता है तब तक रहने देता है, समय पूरा होने पर निकाल देता है तो दूसरे मकान में चले जाते हैं। इसी तरह दूसरों के घरों में भटकते रहते हैं और जीवन पूरा हो जाता है। आत्मा भी शरीर रूपी किराए के घर में अनन्तकाल से भटक रही है। कभी मनुष्य के शरीर में, कभी चींटी, गधा, घोड़ा, कभी नरक में, कभी देवत्व में भटक रही है। ये घर कभी कम से कम एक खिड़की का, अधिक से अधिक 5 खिड़की वाला है। जिससे बाहर की दुनिया को देखा जा सकता है। किराए के मकान में रहते रहते ये भी भूल गए हैं कि ये किराए का मकान हैं। हमने इसे अपना ही मान लिया है। किराया चुकाते हुए ये नहीं लगता कि किराया चुका रहे हैं। ये लगता है कि इन्ही के लिए कमाना ही मेरा धर्म है। ये विचार जैन साध्वी गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने चम्पाबाग जैन धर्मशाला ग्वालियर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।

जब काम पुराना हो जाए तो उसकी आदत हो जाती है
गुरुमां ने बताया कि जब कोई काम अधिक पुराना हो जाए तो वह काम नहीं लगता। उस काम की हमें आदत-सी हो जाती है। वह कार्य जरूरी कामों में सम्मिलित हो जाता है। जबकि ऐसा नहीं हैं । आत्मा का घर मोक्ष है। हम मेले में भटके प्राणी जैसे हैं। हमें कोई बताने वाला भी नहीं हैं कि हमें घर का रास्ता भी बता दे। जो अपने घर यानी मोक्ष जाने की साधना कर रहे हैं वे ही शास्त्र आदि का स्वाध्याय करके आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि ये हमारा घर नहीं हैं, हमारा घर तो मोक्ष है। इसलिए बाहर के घर को छोड़कर निज घर की प्राप्ति के पुरुषार्थ को निकल पड़े हैं और साथ ही हमें बताते है तो हम जान पाए हैं, पर पुराने संस्कार इतने गहरे है कि जानते हुए भी अमल नहीं कर पाते।
बच्चों को प्रदान किया शुभाशीष
श्री गोपाल दिगम्बर जैन संस्कृत विद्यालय मुरैना के कार्याध्यक्ष मनोज जैन, मंत्री सुनील भण्डारी, प्राचार्य चक्रेश शास्त्री, जवाहरलाल बरैया, दिनेश जैन एडवोकेट, शुभम शास्त्री जैन छात्रावास के समस्त छात्रों के साथ गुरुमां के दर्शनार्थ ग्वालियर पहुंचे। माताजी ने छात्रावास में निवासरत सभी बच्चों को मोबाइल के हानि/लाभ से परिचित कराते हुई सभी को शुभाशीष प्रदान किया। इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य राजेन्द्र जैन शास्त्री (मंगरोनी वाले) विशेष रूप से उपस्थित थे।













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