सहारनपुर स्थित अहोभाग्य तीर्थ क्षेत्र, जैन बाग में श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में सल्लेखना सेविका मिलन समारोह का भव्य आयोजन हुआ। यह आयोजन जैन महिला सल्लेखना सेवा मंडल सहारनपुर की मुख्य शाखा एवं 19 उपशाखाओं के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। पढ़िए पारस जैन “पार्श्वमणि” की रिपोर्ट…
मुख्य अतिथि पारस जैन ‘पार्श्वमणि’ पत्रकार कोटा का मंगलाचरण से शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार कोटा के मंगलाचरण से हुआ। उन्होंने अपनी सुरीली आवाज़ में स्वरचित मंगलाचरण पाठ कर वातावरण को भावविभोर कर दिया। समारोह का संचालन अध्यक्षा डॉ. रेणु जैन ने अपनी ओजस्वी वाणी में किया, जबकि अतिथियों का स्वागत कोषाध्यक्ष अरुण जैन ने किया।
महिला वक्ताओं ने सल्लेखना साधना की गहराई पर रखे विचार
शशी जैन, शोभा जैन, रीना जैन, वीना जैन और रेखा जैन ने सल्लेखना की पवित्र साधना और अंतिम क्षणों में किए जाने वाले त्याग पर अपने विचार रखे। इस दौरान जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन ने कहा कि महिलाओं द्वारा धर्मप्रभावना का यह कार्य अद्भुत और प्रेरणादायक है।
आचार्य विमर्श सागर जी महाराज ने कहा — “सल्लेखना सेवा मंडल भारत में प्रथम प्रेरणा स्रोत”
आचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि सल्लेखना सेवा मंडल का यह आयोजन सम्पूर्ण भारत के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि यह मंडल उन माताओं और बहनों के लिए कार्य करता है जिनका अंत निकट होता है, और उनके अंतिम क्षणों को शांतिपूर्ण बनाने का प्रयास करता है। उन्होंने बताया कि सल्लेखना समाधि जैन धर्म का परम फल है और णमोकार मंत्र का उच्चारण मृत्यु के समय आत्मा को मोक्ष मार्ग की दिशा में ले जाता है।
धार्मिक वातावरण में गूंजा ‘जिनागम पंथ जयवन्त हो’ का उद्घोष
समारोह के अंत में “जिनागम पंथ जयवन्त हो” की जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान की संस्थापिका डॉ. रेणु जैन ने अपने कुशल संचालन से कार्यक्रम को सफलता के शिखर पर पहुंचाया।
गुरुदेव का मंगल आशीर्वाद
आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज ने सल्लेखना सेवा मंडल की इस प्रेरणादायक पहल की प्रशंसा करते हुए सभी को मंगलमय आशीर्वाद प्रदान किया।













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