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सकल जैन समाज ने कैंडल मार्च निकाला: जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के आह्वान 27 पर्यटकों को दी श्रद्धांजलि 


कश्मीर के पहलगांव में आतंकवादियों ने 27 पर्यटकों की निर्ममता से हत्या कर दी। इस घटना में कई घायल हुए। इस घटना से पूरा देश शोक मग्न है। इस निंदनीय कृत्य के विरोध एवं मृतकों को श्रद्धांजलि देने हेतु जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के आह्वान पर सकल जैन समाज ने शनिवार को कैंडल मार्च निकाला। शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि दी। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…


  रामगंजमंडी। कश्मीर के पहलगांव में आतंकवादियों ने 27 पर्यटकों की निर्ममता से हत्या कर दी। इस घटना में कई घायल हुए। इस घटना से पूरा देश शोक मग्न है। इस निंदनीय कृत्य के विरोध एवं मृतकों को श्रद्धांजलि देने हेतु जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के आह्वान पर सकल जैन समाज ने शनिवार को कैंडल मार्च निकाला। यह कैंडल मार्च शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर से प्रारंभ होकर माल गोदाम चौराहा पन्नालाल सर्कल, अंबेडकर सर्किल स्टेशन चौराहा होता हुआ शाहजी चौराहे पर पहुंचा। सभी शहीद स्मारकों पर दीप जलाकर श्रद्धांजलि दी गई। इस निर्मम हत्याकांड से समस्त जैन समाज आहत है।

 

यह कृत्य मानवता के लिए अभिशाप है। सभी ने आतंकवाद का पुरजोर विरोध किया। सर्वप्रथम राजकुमार गंगवाल महामंत्री श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर ने इस निंदनीय कृत्य की समाज की ओर से में निंदा की। साथ ही जो घायल हुए हैं। उनके स्वस्थ होने की कामना की। इस अवसर पर प्रकाश धारीवाल ने कहा कि आतंकियों ने धर्म के नाम पर जो हत्याएं की हैं उसकी रामगंजमंडी का जैन समाज एवं संपूर्ण भारतवर्ष का जैन समाज भर्त्सना करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग करता हैं उन्हें इसके लिए कड़ी से कड़ी सजा दें। इस अवसर पर श्री आदिनाथ जैन श्वेतांबर श्री संघ के अध्यक्ष राजकुमार पारख ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि आज से नहीं पीढ़ियों से भारत शांतिपूर्ण देश रहा है। जिस देश में जैन धर्म के लोग रहते हैं वह तो वैसे ही अहिंसा को अपना मूल मंत्र मानकर चलते हैं। हम पहलगाम में हुए हत्याकांड का सकल जैन समाज की ओर से विरोध करते हैं। परमपिता परमेश्वर से यह प्रार्थना करते हैं जितने भी लोग शहीद हुए हैं उन्हें अपने चरणों में स्थान दें और उनके परिवार को जो व्रजपात हुआ है उसे सहने की शक्ति प्रदान करें। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष अखिलेश मेडतवाल ने भी अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। नौ बार णमोकार मंत्र बोलकर श्रद्धांजलि दी गई।

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