आचार्य श्री अनेकाकांतसागरजी महाराज के संघ में 6 पिछिया थी। उनका आहार विहार समाज जनों व मुनिसेवा समिति ,जो धांमनोद में बनी हुई हैउनकी टीम ने सन्त को मानपुर से लेकर गुजरी धांमनोद पैदल विहार करवा के लाये एवं आहारचर्या के बाद मगरखेड़ी व जुलवानिया तक समिति की टीम छोड़कर आयी । धार से मुनिश्री यत्नसागरजी का पैदल प्रवास हुआ ।वहा समाज जन व मुनिसेवा समिति धांमनोद इस भीषण गर्मी में लेकर धांमनोद आयी ।पढि़ए दीपक प्रधान की रिपोर्ट ……
धांमनोद। नगर में एक सप्ताह में आचार्य श्री अनेकाकांतसागरजी महाराज के संघ में 6 पिछिया थी। उनका आहार विहार समाज जनों व मुनिसेवा समिति ,जो धांमनोद में बनी हुई हैउनकी टीम ने सन्त को मानपुर से लेकर गुजरी धांमनोद पैदल विहार करवा के लाये एवं आहारचर्या के बाद मगरखेड़ी व जुलवानिया तक समिति की टीम छोड़कर आयी । धार से मुनिश्री यत्नसागरजी का पैदल प्रवास हुआ ।वहा समाज जन व मुनिसेवा समिति धांमनोद इस भीषण गर्मी में लेकर धांमनोद आयी । फिर पुनः सन्त जी को पैदल दोपहर 4 बजे मगरखेड़ी विहार करवाते ले गई । धरमपुरी से सुनयन माताजी का आगमन हुआ ।
उनको पिपलदागड़ी से विहार करवा के धांमनोद लाये ।माताजी की आहारचर्या हुई। दूसरे दिन माताजी का पैदल ही विहार हुआ ।माताजी को मुनिसेवा समिति गुजरी से घाट ऊपर ढाल में सरकारी स्कूल में ठहराकर मुनिसेवा समिति व महिलामण्डल ने आहारचर्या करवायी । इस भीषण गर्मी में मानव को राहत नही मिल रही। पक्षी ,मवेशी सभी जीव परेशान हो रहे ।ऐसी हालत में जैन सन्त, जैन माताजियों की साधना कितनी कठिन है जो हमें साक्षात देखने को मिल रही। हमारा दिल कांप जाता है। सड़क की तपन जो पैरों चिपकती है शरीर गर्म हो जाता थपेड़ों में ,परन्तु साधना देखने को मिल रही ,साथ मे समाजजन मुनिसेवा समिति धामनोद की साधना भी बहुत ही सराहनीय थी ।
ऊपरोक्त जानकारी समाज अध्य्क्ष महेश जैन व सचिव दीपक प्रधान व मुनि सेवा समिति के अध्यक्ष सचिन जैन, सचिव संजय जैन ने दी। इन व्यवस्थाओं में समाजजन व महिला मण्डल का विशेष सहयोग रहा।













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