विज्ञान नगर में चल रहे अष्टह्निका पर्व के अवसर पर विश्व शांति महायज्ञ के विधान का समापन हुआ। 24 कुंडीय हवन किया गया।विधान पुण्यार्जक परिवार और समाज श्रेष्ठिजनों का सम्मान किया गया। इंद्राणियों की शोभायात्रा निकाली गई। कोटा से पढ़िए यह खबर…
कोटा (राजस्थान)। झूठ ना बोलना वाणी तप है। दूसरों के काम आना काया तप है। अन्य की वस्तु प्राप्त होने पर उसे लौटा देना मन का तप है। गलती होने पर क्षमा मांग लेना प्रायश्चित तप है। आती-जाती सांसों पर केंद्रित होना ध्यान तप है। यह विचार प्रतिष्ठाचार्य पंडित उदय शास्त्री ने विज्ञान नगर में चल रहे अष्टह्निका पर्व के अवसर पर विश्व शांति महायज्ञ के विधान के समापन के अवसर पर व्यक्त किए। मंदिर समिति के महामंत्री अनिल ठौरा ने बताया कि सिद्ध चक्र विधान समाप्ति पर 24 कुंडीय हवन किया गया। इसमें सौधर्म इंद्र त्रिलोक लुहाड़िया, रेखा लुहाड़िया सहित पीके हरसोरा, रितेश सेठी, अरविंद ठौरा, सीए पारस जैन, इंद्रकुमार जैन, महावीर अजमेरा, सीताराम जैन, मुकेश खटोड़, सुनील कासलीवाल आदि ने हवन में आहुतियां दी।
विधान पुण्यार्जक परिवार का सत्कार किया
अध्यक्ष राजमल पाटौदी ने इस अवसर पर त्रिलोक रेखा लुहाडिया,संगीतकार अनीशा जैन और पंडित उदय शास्त्री का आभार माना। प्रमिला पांडे, बाबूलाल जैन, मंजू जैन, अनिल ठौरा, जया पटौदी ने विधान पुण्यार्जक परिवार का अभिनंदन किया। इस अवसर पर त्रिलोक लुहाडिया ने विधान में सहयोग देने वाले सभी महानुभावों का सम्मान किया।
इंद्राणियों की शोभायात्रा निकाली
इस अवसर पर विगत 35 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार एवं सारिका जैन का भी अभिनंदन किया गया। विज्ञान नगर मंदिर से भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा के साथ सभी इंद्राणियों की शोभायात्रा निकाली गई। रितेश सेठी और पीके हरसोरा ने बताया कि विज्ञाननगर में प्रतिवर्ष अष्टह्निका पर्व के अवसर पर सिद्ध चक्रमंडल विधान का आयोजन कर धर्म प्रभावना की जाती है।













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