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रिश्तों में दरार और विघटन मनभेद के कारण : अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी ने सिद्ध भगवान के गुणानुवाद का महत्व समझाया 


श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान आराधना महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन श्री महावीर जिनालय परिवहन नगर में 7 से 14 दिसंबर तक आयोजित किया गया है। सिद्धचक्र मंडल विधान के तीसरे दिन 64 अर्ध्य समर्पित किए गए। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज ने पूजन के दौरान चढ़ा द्रव्यों का कारण उन गुणों के बारे में सरल भाषा में बताया। इंदौर से पढ़िए राजेश पंचोलिया की, यह खबर…


इंदौर। श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान आराधना महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन श्री महावीर जिनालय परिवहन नगर में 7 से 14 दिसंबर तक आयोजित किया गया है। सिद्धचक्र मंडल विधान के तीसरे दिन 64 अर्ध्य चढ़ाए गए। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज ने पूजन के दौरान चढ़ा द्रव्यों का कारण उन गुणों के बारे में सरल भाषा में बताया। जिसमें सिद्ध भगवान का गुणागुवाद किया जाता है। जो संसार के बंधनों से छूट गए हैं। जिनमें अनंत दर्शन ,अनंत ज्ञान, अनंत सुख और अनंत वीर्य प्रकट हो गए हैं, यह मंगल देशना मंदिर परिसर में मुनिश्री पूज्यसागर जी ने प्रकट की।

अध्यक्ष नवनीत जैन एवं राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया कि मुनि श्री ने आगे कहा कि पारिवारिक रिश्तों में दरार और विघटन अविश्वास की दुःखद घटनाएं मनभेद के कारण होती हैं। सिद्ध चक्र महामंडल विधान की पूजन के दौरान मुनि श्री पूज्यसागर जी ने अपने उपदेश में बताया कि आजकल पारिवारिक रिश्तों मां-बेटी, पिता-पुत्री ,भाई-बहन, भाई-भाई, पति-पत्नी, सास-बहु, माता-पुत्र, पिता-पुत्र, ननद-भाभी आदि रिश्तों में दरार और विघटन मनभेद के कारण हो रहा है।

लड़कियां घर छोड़कर अन्य समाज में प्रेम विवाह कर लेती हैं। पारिवारिक रिश्तों में मनभेद के कारणों की विवेचना में बताया कि दुःख-दर्द नहीं सुनना, आपस में समय नहीं देना, साथ में समन्वय की कमी, रिश्तों की उपेक्षा आदि अनेक कारण है। किशोर और युवा को शिक्षा, कॅरियर चयन उनके मन की बात को शांति से प्रेम से गंभीरता से सुनना और समझाना होगा ताकि उन्हें अपनापन लगे और अपनी दिल की बात शेयर कर सके। नाराजगी गुस्सा, मारपीट के दुष्परिणाम भी देखे गए हैं।

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