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नौनिहालों में संस्कार गढ़ने के लिए धार्मिक पाठशाला आवश्यक अंग: 50 बच्चे ज्ञान वर्धनी पाठशाला में कर रहे अध्ययन


ज्ञान वर्धनी पाठशाला के शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें शिक्षक-शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। यह आयोजन कालानी नगर के श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में संपन्न हुआ। इंदौर से पढ़िए राजेश जैन दद्दु की यह खबर…


इंदौर। नौनिहालों में संस्कार गढ़ने के लिए धार्मिक पाठशाला एक आवश्यक अंग है। आज बच्चे लौकिक शिक्षा तो ले रहे हैं लेकिन, उनका व्यवहारिक ज्ञान नगण्य होता जा रहा है। इसका कारण वर्तमान समय में धार्मिक पाठशालाओं की ओर बच्चों एवं अभिभावकों का ध्यान कम होना है। व्यवहारिक जीवन में आधी से अधिक समस्या बच्चों में व्यवहारिक ज्ञान की कमी और अपनी मूल संस्कृति की जानकारी नहीं होने की वजह से है। यह बात ज्ञान वर्धनी पाठशाला के शिक्षक सम्मान समारोह में सामाजिक कार्यकर्ता ऊषा पाटनी ने श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, कालानी नगर में कहीं।

मंगलाचरण से हुई कार्यक्रम की शुरूआत

कार्यक्रम की शुरुआत चहेती पाटोदी, वर्धनी पाटोदी एवं आयुशी जैन के मंगलाचरण से हुई। पाठशाला संयोजक अभय पाटोदी ने विभिन्न नगरों में चलाई जा रही धार्मिक पाठशालाओं की जानकारी दी और बताया कि इस समय गुप्ति सदन चैत्यालय में ही लगभग 50 बच्चे ज्ञान वर्धनी पाठशाला में अध्ययन कर रहे हैं। पाठशाला न केवल बच्चों को धर्म, संस्कारों और परिवार से जोड़ती है बल्कि उनके मानसिक, शारीरिक, आर्थिक और व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण आधार है।

अध्यापिकाओं का किया सम्मान

कार्यक्रम के दौरान पाठशाला अध्यापिका रीना जैन,श्वेता बाकलीवाल, मोनिका पाटोदी, प्रियंका जैन, अंजलि सिंघई, रूबी जैन, अंजू जैन का सम्मान किया गया। पाठशाला की वीर जयघोष टीम के प्रांजल, ज्ञायक,समर्थ,युवराज आदि का भी स्वागत किया गया।

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