आदिनाथ भगवान के गर्भ कल्याणक के शुभ अवसर पर पांच जून को ‘जैन कल्याणक क्षेत्र’ पुस्तक का विमोचन हुआ। इसके लेखक धीरज जैन हैं। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
दिल्ली। आदिनाथ भगवान के गर्भ कल्याणक के शुभ अवसर पर पांच जून को ‘जैन कल्याणक क्षेत्र’ पुस्तक का विमोचन हुआ। इसके लेखक धीरज जैन हैं। यह पुस्तक एक छोटा सा प्रयास है सभी सधर्मी जनों को इन तीर्थ क्षेत्रों के बारे में सचित्र जानकारी और यहां पर तीर्थ यात्रा करने के लिए प्रेरित करने का है ताकि जिनधर्म की परिपाटी लंबे काल तक निर्विघ्न चलती रहे।
पुस्तक में कल्याणक की सचित्र जानकारी:
इस पुस्तक में वर्तमान चौबीसी के चौबीस तीर्थंकर भगवान के 24×5=120 कल्याणक हुए हैं और संयोग की बात यह है कि ये सभी 120 कल्याणक कुल 24 तीर्थ क्षेत्रों पर ही हुए हैं जिनकी सचित्र जानकारी इस पुस्तक में है। साथ ही पंच कल्याणक, सोलह कारण भावनाओं, अष्ट प्रतिहार्य आदि का भी आगम सम्मत वर्णन है जो कि प्राचीन ग्रंथों के आधार से लिया गया है। इसके अतिरिक्त इन सभी चौबीस तीर्थ क्षेत्रों में श्रद्धालुओं को रुकने के लिए धर्मशाला, भोजन व्यवस्था, आसपास के जैन मंदिरों की जानकारी उनके फोन नंबर एवं एड्रेस के साथ दिए गए हैं। इन सभी 24 तीर्थ क्षेत्रों पर पहुंचने के साधन, नजदीकी रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट आदि की जानकारी समाहित है। साथ ही कुछ मुख्य ट्रेन नंबर भी दिए गए हैं।
मनभावन भजनों को गुनगुनाएं
इस पुस्तक में तीर्थ क्षेत्रों से जुड़े हुए प्राचीन एवं मनभावन भजन भी दिए गए हैं, जिन्हें गुनगुनाकर तीर्थ यात्रा करते समय आनंद दुगुना हो जाएगा। जगह जगह पर जैन धर्म की सुंदर सुंदर गाथाएं, श्लोक, वाक्य आदि भी समाहित करे गए हैं। पुस्तक में एक बड़ी सुंदर सी प्रश्नोत्तरी रखी गई है जिसमें लगभग 25 प्रश्न हैं। जिन्हें हल करने में निस्संदेह ही आनंद आएगा। यह पुस्तक एक कोशिश है इन पवित्र तीर्थ क्षेत्रों की महिमा के बारे में बताने की और इन कल्याणक क्षेत्रों की वंदना के लिए उत्साहित करने की। आशा है कि यह पुस्तक उपयोगी लगेगी तथा आपकी तीर्थ यात्रा में सहायक बनकर हमारे इस प्रयास को सार्थक करेगी।













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