पर्यूषण पर्व जैन धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है, जिसे जैन समाज के लोग बहुत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य आत्मशुद्धि, आत्मावलोकन, और आत्मसंयम है। पर्युषण के दौरान जैन लोग तपस्या, उपवास, और प्रार्थना के माध्यम से अपने अंदर की अशुद्धियों को दूर करने का प्रयास करते हैं। इसे आत्मशुद्धि का पर्व भी कहा जाता है। पर्यूषण पर्व का अंत ‘अणुव्रत’ या ‘पारणा’ के साथ होता है, जिसमें उपवास समाप्त होता है और लोग सामान्य जीवन में लौटते हैं। इस पर्व का उद्देश्य जीवन में नैतिकता, संयम, और अहिंसा के सिद्धांतों को प्रबल करना है। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज द्वारा लिखित पुस्तक पर्यूषण में आप इस महापर्व के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं….
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