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दीक्षार्थी ब्रह्मचारिणी मधुबालाजी सराफ की बिनौरी निकाल गोद भराई की गई : जीवन के किसी भी क्षण में वैराग्य उभर सकता है


आगामी 22 जुलाई को शाश्वत तीर्थ अयोध्या में आर्यिका गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के द्वारा 6 भव्य जैनेश्वरी दीक्षाएं प्रदान की जाएंगी। इसी अवसर पर सनावद जैन समाज को दीक्षार्थी मधुबाला सराफ की बिनौरी एवं गोद भराई करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जिसमें एक दिन पूर्व दीक्षार्थी परिवार विशाल कुमार भाई वैभव कुमार सराफ के द्वारा भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। पढ़िए सन्मति जैन काका की विशेष रिपोर्ट…


सनावद। जीवन के किसी भी क्षण में वैराग्य उभर सकता है। इन्हीं पक्तियों को चरितार्थ करते हुए ब्रह्मचारिणी मधुबाला सराफ वैराग्य पथ के ओर अग्रसर हो रही हैं। सनावद नगरी त्याग और संयम के पथ पर अग्रसर होने वाले तपस्वियों की नगरी है। यहां की मिट्टी का हर एक कण पवित्र है। जिस पथ पर ये ब्र.मधुबाला सराफ भी निकल पड़ी हैं, ये पथ बहुत ही कठिन और मुश्किलों से भरा है। आप इस पथ पर निरंतर आगे बड़े यही मंगल कामना है। सन्मति जैन काका ने बताया की आगामी 22 जुलाई को शाश्वत तीर्थ अयोध्या में आर्यिका गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के द्वारा 6 भव्य जैनेश्वरी दीक्षाएं प्रदान की जाएंगी।

इसी अवसर पर सनावद जैन समाज को दीक्षार्थी मधुबाला सराफ की बिनौरी एवं गोद भराई करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जिसमें एक दिन पूर्व दीक्षार्थी परिवार विशाल कुमार भाई वैभव कुमार सराफ के द्वारा भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया एवं अगले दिन इसी कड़ी में सर्वप्रथम श्री दिगम्बर जैन पार्श्वनाथ बड़ा जैन मंदिर में श्रीजी का भव्य पंचामृत अभिषेक एवं पूजन किया गया।

तत्पश्चात बड़ा मंदिर जी से बिनौरी निकाली गई जो नगर के मुख्य मार्गों से होती हुई जैन धर्मशाला में धर्मसभा के रूप में सम्पन हुई। जहां सर्वप्रथम भगवान महावीर स्वामी के चित्र के समक्ष समाज के वयोवृद्ध मनु बहनजी, न.पा अध्यक्ष सुनीता इंदर बिरला न.पा उपाध्यक्ष नैना मनीष चौधरी व ब्र.मधुबाला सराफ के द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। मंगलाचरण प्रदीप पंचोलिया के द्वारा किया गया एवं आराध्या सराफ के द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया।

ब्रह्मचारिणी मधुबाला की सराफ के परिवार की बहु एवं बेटियों के द्वारा वैराग्य गीत की प्रस्तुति दी गई। अगली कड़ी में सर्वप्रथम दीपाली धर्मेन्द्र जैन बेडिया, उषा लाठिया, निकिता सराफ एवं सुनील के जैन द्वारा दीक्षार्थी के प्रति अपने भाव प्रकट किये । ततपश्चात ब्र.मधुबाला सराफ ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम में बचपन से ही हम में धार्मिक गुणों का बीजारोपण हुआ है। शुरू से ही जिनमंदिर जाना, स्वाधाय करना, प्रतिदिन की दिन चर्या में सम्मिलित था। विवाह बाद ससुराल में भी वही माहौल मिला एवं देव शास्त्र व गुरु की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ। बचपन से ही हर कोई अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जी रहा है। हमें ये चिन्तन करना है कि हमें ये मनुष्य भव क्यों मिला, क्या करना है इस पर विचार करना चाहिए। नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माता जी ने कहा कि हम भी कहां से आए हैं, कहां जाना है और इसकी क्या सार्थकता कैसी है, बस इसी भाव को समझते हुए हमने मोक्ष मार्ग की ओर ये कदम बढ़ाया है। संसार मार्ग और मोक्ष मार्ग ये दो मार्ग होते हैं। हमने मोक्ष मार्ग अपनाया और आज हम दीक्षा लेने की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

इसी बीच में केशव एंड पार्टी भोपाल ने सुमधुर भजन प्रस्तुत किये। सकल जैन समाज मुनि सेवा समिति व आचार्य श्री वर्धमान सागर युवा संघ व आचार्य वर्धमान सागर बहु मंडल एवं अंतर्राष्ट्रीय पोरवाड सामाजिक मंच की ओर से दीक्षार्थी को स्मृति स्वरूप सम्मान पत्र दिया गया, जिनका वाचन प्रशांत चौधरी, अनुभव सराफ एवं आयुषी जैन ने किया। इस अवसर पर बड़वाह, महेश्वर, धामनोद, इंदौर खंडवा बेडिया मोगावा सहित सभी समाजजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रशांत चौधरी ने किया।

ब्रह्मचारिणी मधुबाला जी सराफ का जीवन परिचय

आप का जन्म सन 1959 को भारत के प्रसिद्ध मिर्च मंडी बेड़िया ग्राम मे श्रीमती सरोज बाई तिलोक चंद जी के यहां हुआ। आपने लौकिक शिक्षा 10 वीं तक प्राप्त की। आपका विवाह सनावद के सुप्रसिद्ध श्रावक श्री प्रकाश चंद जी सराफ (पंचोलिया )से हुआ। आपने अपने जेठ क्षुल्लक श्री मोती सागर जी के दीक्षा अवसर दिनांक 8 मार्च 1987 पर आजीवन शुद्र जल का त्याग किया किया। विवाह के बाद आपकी पुत्री चंद्रिका और दो पुत्र वैभव और विशाल हुए।

पुत्री बाल ब्रह्मचारिणी चंद्रिका ने पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से 14 मार्च 1993 को 5 वर्ष का ब्रह्मचर्य व्रत अंगीकार किया। आपकी पुत्री ने परम पूज्य गणनी आर्यिका श्री ज्ञान मति माताजी से 17 फरवरी 2010 को आर्यिका दीक्षा हस्तिनापुर में ग्रहण कर आर्यिका श्री सुदृदमति बनीं। उसी दिन माता पिता श्री प्रकाशचंदजी एवं श्रीमती मधुबाला जी ने आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत आर्यिका श्री ज्ञानमती जी से लिया। आपने आर्यिका श्री ज्ञानमती जी से दो प्रतिमा और 3 प्रतिमा के व्रत वर्ष 2013 में लिए।

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