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पुरुषार्थ नहीं किया तो जीवन पर्याय व्यर्थ चला जाएगाः आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज

  • जैसे ही आत्मा निकली, शरीर में अनन्त जीव पैदा हो जाते हैं
  • धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं को आचार्य श्री सम्बोधन

न्यूज़ सौजन्य – कुणाल जैन

प्रतापगढ़। आचार्य श्री सुन्दर सागर जी महाराज ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि वीतराग मुद्रा धारण करने के बाद ही वीतराग वाणी बहती है। भगावन महावीर वीतराग मुद्रा धारण कर आत्मा में रहे, भगवन्ता को प्राप्त किया। जिन शासन मिला आत्मा के लिए, पुरुषार्थ नहीं किया तो जीवन पर्याय व्यर्थ चला जाएगा। यदि आपका मिट्टी, सोने-चांदी का महल होगा तो छोड़ना ही होगा। स्वेचछा से छोड़ो तो वेलकम, वरना घर वाले तो…। इस शरीर को सजाया, पर जिस समय इस तन से आत्मा निकल जाएगी, आपके ही मा-बाप, बच्चे आपको अलग रूम में रख देंगे। जब तक आत्मा शरीर में है, तब तक आप सबके लिए अच्छे हो। जैसे ही आत्मा निकली, शरीर में अनन्त जीव पैदा हो जाते हैं। आपके जीवित शरीर पर दुग्ध स्नान कराया पर वो किसी काम का नहीं रहा। आप खुद भी वह दूध नहीं पिएंगे।
आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं के सामने प्रवचन में यह भी कहा कि दूध आप जिनेन्द्र परतिमा पर अभिषेक करने के लिए डालते हैं तो वह पवित्र हो जाता है। आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी ने श्लोक-कथा में कहा है कि आत्मा दो प्रकार की होती है। शुद्ध आत्मा और अशुद्ध आत्मा। शुद्ध आत्मा अरिहन्त प्रभु की होती है। अशुद्ध आत्मा भी दो प्रकार की होती है। स्वयं का बोध नहीं तो जिन वाणी का श्रवण करना व्यर्थ है। आप क्या हैं, यदि आपको इसका बोध नहीं तो खुद का कल्याण कैसे कर पाओगे। जिस आत्मा में जानने, सुनने, देखने की क्षमता है, पर उसमें क्रोध, माया लोभ है तो वह अशुद्ध आत्मा है। अध्यात्म शास्त्र पढ़ने से पहले खुद को जान लेना। आत्मा का स्वभाव देखना, जानना है, पर जब क्रोध होता है तो मेरी आत्मा अशुद्ध हो जाती है। गुलाब जामुन का स्वाद तो खाने से बता सकते हैं। आत्मा का आनन्द भी अनुभव करने से आएगा।

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