श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर वैशाली नगर ब्रज विहार में स्थित मानस्तंभ का शुद्धिकरण नवीनीकरण का तीन दिवसीय कार्यक्रम 19 से 21 जुलाई तक अंतर्मुखी परम पूज्य मुनि श्री पूज्य सागर जी सानिध्य में हुआ। मान स्तंभ में ऊपर चार तथा नीचे चार जिन प्रतिमाएं विराजित की गई। इंदौर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…
इंदौर। श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर वैशाली नगर ब्रज विहार में स्थित मानस्तंभ का शुद्धिकरण नवीनीकरण का तीन दिवसीय कार्यक्रम 19 से 21 जुलाई तक अंतर्मुखी परम पूज्य मुनि श्री पूज्य सागर जी सानिध्य में हुआ। मान स्तंभ में ऊपर चार तथा नीचे चार जिन प्रतिमाएं विराजित की गई। मुनि श्री पूज्य सागर जी के सानिध्य में 21 जुलाई सोमवार को यह प्रतिष्ठापना हुई।
इसके पूर्व अंतर्मुखी 108 मुनि श्री पूज्य सागर जी ने प्रवचन में कहा कि जिस प्रकार जीवन में माता प्रथम गुरु हितैषी होती है। उसी प्रकार वीतरागी सर्वज्ञ और हितोपदेशी भगवान द्वारा प्रतिपादित जिनवाणी उपकारी है। सभी को देव शास्त्र और गुरु पर दृढ़ श्रद्धान कर संत वाद ओर पंथ वाद से दूर रहकर स्व विवेक ज्ञान अनुसार सभी दिगंबर पिच्छी कमंडल तीन कम नौ करोड़ मुनिराज की विनय करना चाहिए।
श्रीजी की आरती के बाद गुरु भक्ति हुई
समाज अध्यक्ष सुभाष पाटनी एवं मंत्री देवेंद्र छाबड़ा ने बताया कि 19 जुलाई को घट यात्रा निकाली जाकर मानस्तंभ का शुद्धिकरण किया गया। ध्वजारोहण के पश्चात सभी पात्र इंद्रों का विधानाचार्य पंडित पारस जैन द्वारा सकलीकरण कराया जाकर जाप कराए गए। 20 जुलाई को श्रीजी के अभिषेक के बाद दोपहर को याग मंडल की पूजन की गई।
मान स्तंभ की शुद्धि हुई। शाम को मुनि श्री पूज्यसागर जी का आगमन हुआ और श्रीजी की आरती के बाद गुरु भक्ति हुई। 21 जुलाई को प्रातः अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन के बाद पुण्यार्जक परिवारों द्वारा विश्व शांति हेतु हवन किया गया। सुभाष गुणमाला पाटनी परिवार, विजय सरोज कासलीवाल परिवार, वैभव कमलेश पंचोली परिवार, अमित नीलम जैन परिवार, दिनेश सविता परिवार, सुभाष मालती जैन परिवार, शिरीष मोना जैन परिवार, अभिषेक पायल जैन ने प्रतिमाएं विराजित की।
छत्र पुनीत विजय बज परिवार, मयंक दीपशिखा जैन परिवार, संजय साधना जैन परिवार, अजित जय जैन परिवार द्वारा विराजित किए गए। प्रथम दिन अजितकुमार राकेश प्रतिभा परिवार’द्वारा ध्वजारोहण किया गया। मान स्तंभ का निर्माण समाधिस्थ श्री निजानंद सागर जी की प्रेरणा और सानिध्य में वर्ष 1997 में हुआ। नगर गौरव मुनि श्री प्रणीत सागर जी की प्रेरणा से मानस्तंभ का शुद्धिकरण कार्य कुछ माह पूर्व मुनि श्री के सानिध्य में प्रारंभ हुआ था।













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