इंदौर के परिवहन नगर में मुनि श्री पूज्य सागर महाराज का पिच्छी परिवर्तन समारोह भव्य शोभायात्रा और श्रद्धामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह में समाजजनों की सक्रिय भागीदारी और मुनि श्री का प्रेरक प्रवचन आकर्षण का केंद्र रहा। पढ़िए श्रीफल साथी प्रीतम लखवाल की यह विशेष रिपोर्ट..…
इंदौर। दिगंबर जैन परिवहन नगर में अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज का पिच्छी परिवर्तन समारोह श्रद्धा और भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। समारोह से पूर्व आठ सुसज्जित बग्गियों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे क्षेत्र को धर्ममय बना दिया।
पहली बग्गी में रेखा संजय जैन एवं जितेंद्र मोनिका जैन पिच्छी लेकर विराजमान रहे।
मंगलाचरण व सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
सभा का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। निधि जैन, अंकुरि जैन, मीनल जैन एवं श्रद्धा जैन ने भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
अन्नू जैन ने चातुर्मास के चार महीनों के महत्व को कविता के माध्यम से सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
दीप प्रज्ज्वलन और पाद प्रक्षालन
दीप प्रज्ज्वलन संदीप जैन, सुशील पंड्या, डॉ. अनुपम जैन, सेवानिवृत्त डीएसपी डी.के. जैन एवं समाज अध्यक्ष नवनीत जैन द्वारा किया गया।
मुनि श्री का पाद प्रक्षालन अमित कासलीवाल, नवीन गोधा, सोमचंद जैन, कैलाश वेद, संजय पापड़ीवाल, संजय बड़जात्या, पवन पाटोदी एवं रितेश पाटनी ने किया।
पिच्छी परिवर्तन का पावन क्षण
मुनि श्री ने अपनी पुरानी पिच्छी वर्धित सोनल जैन परिवार को प्रदान की। नई पिच्छी अभिषेक जैन, रोहित जैन, सम्यक जैन, लवीश जैन, निधि जैन एवं समाज की ओर से भेंट की गई। यह क्षण उपस्थित जनसमूह के लिए अत्यंत भावुक और स्मरणीय रहा।
आत्मीय अभिव्यक्ति
रोहित–मीनल, अभिषेक–श्रद्धा, वर्णित–सोनल, लवीश–अंकुरी, सम्यक एवं निधि सहित युवाओं ने प्राचीन पद्धति के अनुसार तैयार किया गया पत्र प्रस्तुत किया। इस पत्र में मुनिश्री और युवाओं के बीच बीते पाँच महीनों के आत्मीय संबंधों का भावपूर्ण वर्णन कविता के माध्यम से किया गया।
सम्मान-अभिनंदन
समाज की ओर से सौधर्म इन्द्र कमलेश-टीना जैन का स्वागत किया गया। सिद्धचक्र विधान के मुख्य पुण्याजक चंद्रकांता जैन, जितेंद्र-मोनिका जैन एवं संदीप जैन का सम्मान किया गया। वहीं विधान के मुख्य स्तंभ नरेंद्र वेद, नकुल पाटोदी, तल्लीन बड़जात्या तथा केसरिया कैटरर्स का शब्दों से अभिनंदन किया गया।
मुनि श्री का सारगर्भित प्रवचन
प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि धर्म को पंथ और संतों में बांटने के बजाय यह समझना चाहिए कि जो संत नग्न अवस्था में पिच्छी और कमंडल धारण करता है, वह श्रद्धा का अधिकारी है।
उन्होंने कहा कि पंचम काल में जहां श्रावकों की क्रियाओं में शिथिलता आई है, वहीं मुनियों के उत्तर गुणों पर भी प्रभाव पड़ा है, लेकिन 28 मूल गुणों का पालन प्रत्येक दिगंबर साधु करता है।
मुनि श्री ने युवाओं से पंथवाद से दूर रहकर स्वयं और समाज के उत्थान हेतु कार्य करने का आह्वान किया।
समापन व आभार
कार्यक्रम में प्रकाश जैन, विमल झांझरी, सुदर्शन जटाले, विकास जैन, विनोद शोभा जैन, रितेश पिंकी कासलीवाल, हितेश नयना कासलीवाल, नीलेश जैन, अमित दबाडे, दिलीप दबाड़े, संजय जैन, शिरीष जैन, दीपक जैन, अखिलेश कासलीवाल, राजू मोदी, मुकेश जैन, प्रेमसिंग जैन, नीलेश प्रतिभा जैन सहित कई समाज श्रेष्ठी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में आए अतिथियों का स्वागत पूज्य वर्षायोग समिति एवं परिवहन नगर जैन समाज द्वारा किया गया।
संचालन श्रेष्ठी जैन एवं मीनल जैन ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन समाज अध्यक्ष नवनीत जैन ने व्यक्त किया।
जहाँ मुनि चरण रखते हैं, वहाँ धर्म केवल बोला नहीं जाता—जीया जाता है।













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