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प्रो. राजुल रस्तोगी का यूएस की बिजनेस पत्रिका में छपा साक्षात्कार : यूनिवर्सिटी के लिए यह गर्वपूर्ण उपलब्धि, सभी ने दी बधाई


अमेरिकी पत्रिका-सीआईओ प्राइम ने सीनियर रेडियोलॉजिस्ट प्रो. राजुल रस्तोगी के साक्षात्कार को प्रकाशित कर मुखपत्र पर प्रमुखता से चित्र भी लगाया। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी ने उनकी इस उपलब्धि पर गर्व जताया। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर…


मुरादाबाद। चीफ इंफॉर्मेशन ऑफिसर्स, आईटी अफसरों और एंटरप्राइज इन्नोवेशन एवं् डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का नेतृत्व करने वाले टेक्नोलॉजी रणनीतिकारों को समर्पित डिजिटल अमेरिकन बिजनेस पत्रिका-सीआईओ प्राइम में अपना इंटरव्यू प्रमुखता से प्रकाशन के बाद टीएमयू हॉस्पिटल के सीनियर रेडियोलॉजिस्ट प्रो. राजुल रस्तोगी वैश्विक पटल पर छा गए हैं। इस प्रतिष्ठित पत्रिका ने अपने फ्रंट पेज पर न केवल प्रो. राजुल रस्तोगी का चित्र प्रमुखता से प्रकाशित किया है, बल्कि ड्राइविंग इन्नोवेशन इन एजुकेशन पर केंद्रित इंटरव्यू भी प्रकाशित किया है। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के आला प्रबंधन को सीनियर रेडियोलॉजिस्ट प्रो. राजुल रस्तोगी की इस उपलब्धि पर गर्व है। प्रो. राजुल ने इस साक्षात्कार में स्वीकार किया कि इंडिया का हैल्थकेयर सेक्टर सघन ट्रेनिंग के बूते बेहद स्ट्रांग है, क्योंकि यह प्रशिक्षण स्मार्ट टीचर्स के जरिए दिया जाता है। उल्लेखनीय है कि सीआईओ प्राइम डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का नेतृत्व करने वाले टेक्नोलॉजी रणनीतिकारों के लिए एक प्रमुख डिजिटल हब है। सीआईओ प्राइम पत्रिका उद्योग के सीआईओएस और लीडर्स के विस्तृत साक्षात्कार, सफल डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन केस स्टडीज और आईटी गवर्नेंस और जोखिम प्रबंधन पर श्वेतपत्र प्रकाशित करता है। इस ख़ास इंटरव्यू में प्रो. रस्तोगी स्वीकारते हैं कि इंडिया में मेडिकल क्षेत्र में एआई को लागू करने में विविधताएं सबसे बड़ा मुद्दा हैं। इसके लिए सबसे पहले मेडिकल एजुकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग में सुधार करना जरूरी है। देशभर में समान मेडिकल एजुकेशन और ट्रेनिंग देनी होगी, जिसके लिए एआई एक बेहतर विकल्प है।

मेडिकल प्रोफेशनल्स को एआई की सघन ट्रेनिंग देना जरूरी 

प्रो. राजुल इंटरव्यू में कहते हैं कि यूं तो एआई का इतिहास 50 साल से अधिक का है। कम्प्यूटर सेक्टर में करीब 30 और मोबाइल सेक्टर में करीब 20 साल से एआई का प्रयोग किया जा रहा है। मेडिकल सेक्टर में एआई का प्रयोग करने में अभी भी गुरेज किया जा रहा है। इसका प्रमुख कारण डॉक्टर्स को एआई तकनीक के फाउंडेशन के ज्ञान और यह कैसे काम करेगी इसका अभाव है। बकौल प्रो. रस्तोगी मेडिकल वर्कर्स का मानना है, एआई मानव को रिप्लेसमेंट कर देगी, जबकि यह एक भ्रम है। यह एक अच्छे सहायक के रूप में काम को और आसान और एक्यूरेट करने में सहायता करेगी, लेकिन हमें सबसे पहले मेडिकल प्रोफेशनल्स को एआई की सघन ट्रेनिंग देना जरूरी है। हमें एआई का एक ऐसा मॉडल डवलप करना होगा, जो दुनिया के लिए नजीर बन सके। इमरजेंसी केयर, कैंसर, डायबिटीज़, किड़नी, हार्ट, मेंटल डिसऑर्डर सरीखी बीमारियों में एआई का प्रयोग वरदान साबित होगा। डॉक्टर्स के लिए पैशन, कंपैशन और इथिक्स का कॉम्बिनेशन जरूरी है। हमारा मुख्य फोकस डॉक्टर्स, पीजी स्टुडेंट्स, हैल्थ सेक्टर वर्कर्स आदि को भी एआई का प्रयोग करने में सक्षम बनाना है।

मुख्यमंत्री भी हैल्थ सेक्टर में एआई के क्रियान्वयन को लेकर संजीदा

उल्लेखनीय है कि प्रो. राजुल रस्तोगी आईआईआईटी, हैदराबाद से एआई में सर्टिफिकेट कोर्स कर चुके हैं। वर्तमान में वह जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी-यूएसए के साथ ही नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज़ से भी एआई का सर्टिफिकेट कोर्स कर रहे हैं। प्रो. रस्तोगी कहते हैं कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी हैल्थ सेक्टर में एआई के क्रियान्वयन को लेकर संजीदा हैं, इसीलिए सूबे के स्वास्थ्य एवं् परिवार कल्याण, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की ओर से जनवरी में इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट-2026 की रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस की थी। जिसमें तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्रिंसिपल प्रो. एनके सिंह के साथ रेडियोडायग्नोसिस विभाग के सीनियर रेडियोलॉजिस्ट प्रो. राजुल रस्तोगी बतौर नोडल अधिकारी शिरकत कर चुके हैं। समिट में संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज को मेडिकल सेक्टर में एआई मॉडल को लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें सूबे के प्रमुख मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।

दृष्टिकोण को साझा करना अत्यंत सम्मान की बात 

टीएमयू के प्रो. रस्तोगी मानते हैं कि यूएस की प्राइम मैगजीन सीआईओ में मेडिकल शिक्षा के विकास यात्रा और दृष्टिकोण को साझा करना अत्यंत सम्मान की बात है। यह साक्षात्कार मेडिकल साइंस के प्रति मेरे उस आजीवन जुनून को दर्शाती है, जिसका बीजारोपण रेडियोलॉजी सूट में कदम रखने से बहुत पहले ही हो गया था। कहते हैं, वैज्ञानिक डाटा एकत्र करने के शुरुआती दिनों से लेकर एजुकेटर ऑफ एआई इन हैल्थेकयर के रूप में वर्तमान भूमिका तक मेरा लक्ष्य सदैव चिकित्सा के लिए संवेदनापूर्ण और सटीक भविष्य का निर्माण करना रहा है।

हम डेटा कंडक्टर्स तैयार कर रहे हैं

रस्तोगी ने मेडिकल पीजी प्रशिक्षण में हो रहे बदलावों, एजुकेशनल मल्टीपिलर के रूप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका और अमेरिकन बिजनेस पत्रिका-सीआईओ प्राइम में इस बात पर गहराई से चर्चा की है कि कैसे इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक्स विकसित भारत के सपने को साकार करने की कुंजी है। रोट लर्निंग से आगे बढ़कर क्रिटिकल थिंकिंग और टेक्नोलॉजिकल सिनर्जी की मेरी फिलॉसफी बेहद सरल है। हम केवल रेडियोलॉजिस्ट नहीं तैयार कर रहे हैं। हम डेटा कंडक्टर्स तैयार कर रहे हैं, जो नैतिक सटीकता के साथ एआई, रेडियोमिक्स और पैथोमिक्स की जटिलताओं का नेतृत्व कर सकें।

रेडियोलॉजी में 25 सालों का लंबा अनुभव 

उल्लेखनीय है कि प्रो. रस्तोगी को रेडियोलॉजी में 25 सालों का लंबा अनुभव है। वह 10 बरस से टीएमयू में अपनी सेवाएं दे रहे है। प्रो. रस्तोगी 2024 में यूरोपियन कांग्रेस ऑफ रेडियोलॉजी-ईसीआर की ऑस्ट्रिया, इंटरनेशनल कांग्रेस ऑन एमआरआई- आईसीएमआरआई की साउथ कोरिया में इंटरनेशल कॉन्फ्रेंस के साथ आरआईसीओएन-2024 की स्टेट कॉन्फ्रेंस, एशियन ओशियनियन कांग्रेस ऑफ रेडियोलॉजी-एओसीआर एवं इंडियन रेडियोलॉजिकल इमेजिंग एसोसिएशन- आईआरआईए-2025 की चेन्नई की नेशनल कॉन्फ्रेंस में अपने रिसर्च पेपर्स/व्याख्यान दे चुके हैं।

प्रो. राजुल अब तक 15 देशों की विजिट कर चुके

प्रो. रस्तोगी के 215 पब्लिकेशन्स भी नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर प्रकाशित हो चुके हैं। लगभग 826 से अधिक शोधार्थी इनका संदर्भ ले चुके हैं। इसके अलावा रेडियोलॉजी एंड दीगर सब्जेक्ट्स बुक्स पर प्रो.राजुल के करीब 15 टेक्सट बुक्स में करीब 50 चौप्टर्स भी प्रकाशित हैं। इंटरनेशनल स्तर के छह और नेशनल स्तर के करीब एक दर्जन से अधिक अवार्ड भी प्रो. रस्तोगी की झोली में शामिल हैं। प्रो. राजुल अब तक 15 देशों की विजिट कर चुके हैं। वह करीब 125 विभिन्न नेशनल और इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में लगभग 210 से अधिक रिसर्च पेपर प्रस्तुत कर चुके हैं।

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