जैन जगत के प्रतिष्ठित पुरस्कारों में शामिल ऋषभदेव व अन्य पांच पुरस्कार प्रदान करने के लिए 25वां पुरस्कार समर्पण समारोह आध्यात्मिक ध्यान योग केन्द्र पांचल के स्थापना दिवस पर 26 मई को सम्पन हुआ। पढ़िए सुनील जैन संचय की रिपोर्ट…
ललितपुर। जैन जगत के प्रतिष्ठित पुरस्कारों में शामिल ऋषभदेव व अन्य पांच पुरस्कार प्रदान करने के लिए 25वां पुरस्कार समर्पण समारोह आध्यात्मिक ध्यान योग केन्द्र पांचल के स्थापना दिवस पर 26 मई को सम्पन हुआ। अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी बाल ब्रह्मचारी मां श्री कौशल के सान्निध्य में भारत सरकार में पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ.मुरली मनोहर जोशी ने जैन दर्शन के मूर्धन्य वरिष्ठ विद्वान प्रो. फूलचंद प्रेमी वाराणसी को ऋषभदेव पुरस्कार व सम्पादक, पत्रकार ओजस्वी वक्ता राजेन्द्र जैन महावीर सनावद को अपमाचल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ऋषभांचल तीर्थ पर हुए भव्य समारोह में तीर्थ के अध्यक्ष जीवेन्द्र जैन, उपाध्यक्ष जे.के. जैन हेमचंद जैन, महामंत्री आर. सी. जैन, मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष अतुल जैन, सुधीर जैन, मीडिया प्रभारी अजय जैन आदि ने सम्मानित किया। इस अवसर पर जैन दर्शन के सूर्यन्य विद्वान प्रो. नरेन्द्र कुमार जैन टीकमगढ़, डॉ. अनेकांत जैन दिल्ली, बीरेन जैन टीकमगढ़, जैन मिलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय जैन सुना, विधायक दिनेश गोयल, पुरातत्त्व अन्वषी शैलेन्द्र जैन लखनऊ आदि गणमान्यजन उपस्थित थे। ऋषभांचल तीर्थ पर संचालित स्प्रिंग डेल पब्लिक स्कूल व ऋषभांचल पब्लिक स्कूल के बच्चों ने शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये।
ध्यान-योग का अद्भुत तीर्थ ऋषभांचल – डॉ. मुरली मनोहर जोशी
समारोह को सम्बोधित करते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी के कहा कि मां श्री कौशल के तप त्याग की आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हैं। ऋषभांचल तीर्थ ध्यान योग के लिए अद्भुत तीर्थ है। यहां से मैं विगत 33 वर्ष से जुड़ा हूं। यहां मां श्री कौशल के तप का प्रभाव देखा जा सकता है। कोरोना संकट के बाद पहली बार दिल्ली से बाहर निकलकर चल तीर्थ आया हूं। संवाद और समन्वय जीवन का आवश्यक अंग हैं। संवाद के माध्यम से किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। पदाधिकारियों ने डॉ. जोशी का अभिनंदन भी किया।

केवल जैन धर्म में व्यवस्था है कि हम भगवान बन सकते है
आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण ध्यान योग साधिका माँ श्री कौशल ने कहा कि ऋषभदेव के कारण हमारी पहचान है। हमें उन्होंने जीवन जीने की कला सिखाई। हमें इस बात का गौरव होना चाहिये कि जैनधर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है, जो हमें भगवान बनने की कला सिखाता है। योगासन हमको शारीरिक ऊर्जा लाभ दे सकता है। ध्यान हमें आध्यात्मिक शांति के माध्यम अनंत शांति और अनंत शक्ति का अनुभव करा सकता है।

जैनेन्द्र सिद्धान्त कोष का लेखन
उल्लेखनीय है कि मां कौशल ने जैनेन्द्र सिद्धान्त कोष के लेखन में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हुए पूज्य जिनेन्द्र वर्गीजी के साथ जैनेन्द्र सिद्धांत कोष लिखने का संकल्प लिया था, जो जन जगत की महत्त्वपूर्ण कृति है। मां श्री कौशल ने सम्पूर्ण भारतवर्ष में भ्रमण कर आध्यात्मिक ऊर्जा, ध्यान योग का संदेश सम्पूर्ण भारत वर्ष में दिया है। 26 मई को भी श्री कौशल के जन्म दिवस अवसर पर सभी ने उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं।













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