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आचायश्री विशुद्धसागर जी के शिष्यों के आगमन की तैयारियां: नांद्रे के जैन समाज में अपार उत्साह का संचार 


पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य सारस्वत सागर जी, जयंत सागर जी, सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर महाराज जी के चरणरज से नांद्रे की भूमि पवित्र होगी। मंगल प्रवेश और विहार की तैयारियां की जा रही हैं। जैन समाज के श्रद्धालुओं में उत्साह है। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक पाटील की यह खबर…


नांद्रे। नांद्रे में पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी के शिष्य सारस्वत सागर जी, जयंत सागर जी, सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर महाराज जी का नांद्रे में होनेवाला है। 2025 का चौमासा और मुनिराजों की चरणरज से नांद्रे की भूमि पवित्र होगी। श्री विशुद्धसागर जी के शिष्यों के आगमन को लेकर नांद्रे के जैन समाज एवं नगर के लोगों में काफी उत्साह है। श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष जिनेश्वर पाटील, सेक्रेटरी सुधीर चौधरी, अनिल पाचोरे, निखिल पाटील, वीर सेवा दल नांद्रे, वीर महिला मंडळ, पार्श्व महिला परिषद, जैन युवा मंच के युवा पदाधिकारी, प्रभावणा समिति के कार्यकर्ता, श्रावक-श्राविकाओं के मुनिराजों का इंदौर से नांद्रे तक विहार और 2025 के चातुर्मास को सफल करने के लिए प्रयास शुरु हैं। विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य सारस्वत सागर जी, जयंत सागर जी, सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर महाराज जी का इंदौर से बारामती-विटा-तासागांव से नांद्रे तक 800 किमी का पद विहार शुरु है।

नांद्रे का यह प्राचीन श्री महावीर दिगंबर मंदिर 100 साल पुराना है

श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, नांद्रे का यह प्राचीन मंदिर 100 साल पुराना है और पत्थर का मानस्तंभ हैं। नांद्रे में जैन समाज के 1300 घर हैं। नांद्रे गांव के अभी तक 3 भट्टारक स्वामीजी जी हुए हैं। आदिनाथ भगवान जी की प्रतिमा भट्टारक महाराज जी ने बनवाई है। पट्टाचार्य भगवन श्री विशुद्धसागरजी सहित 32 मुनि महाराजों का नांद्रे में जनवरी में मंगल प्रवेश हुआ था। वर्धमान सागर महाराज जी के संघ के 2 महाराज जी ऐसे एक साथ 34 मुनिराजों का सानिध्य नांद्रे नगर को मिला था। इस अवसर पर उनकी अगवानी बैंड-बाजों के साथ बड़ी संख्या में जैन समाज एवं अन्य लोगों ने की थी। बाजे-गाजे के साथ श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागरजी पहुंचे थे। सकल दिगंबर जैन समाज के लोगों ने जगह-जगह पर पाद पूजन करके उन्हे श्रीफल भेंटकर आशीष लिया था। नांद्रे के श्रावक-श्राविका एवं युवक-युवती उपस्थित थीं। आचार्य श्री विशुद्धसागर जी के मंगल प्रवचन हुए थे। मुनिराजों की आहारचर्या नांद्रे नगर के विभिन्न जैन बंधुओं के घर में हुई थी। अपने प्रवचनों में आचार्य श्री विशुद्धसागर जी ने कहा था कि नगर में एकमात्र श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर है। यह उल्लेखनीय बात है कि यहां जैन एकता देखने को मिली हैं।

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