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राष्ट्रसंत आचार्य विहर्ष सागर महाराज के प्रवचन : माता तू दया करके, कर्मों से छुड़ा देना, इतनी सी विनय तुमसे, चरणों में जगह देना


दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, इंदौर एवं सोशल ग्रुप फैडरेशन, इंदौर रीजन के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रसंत आचार्य विहर्ष सागर महाराज ने बड़ा गणपति स्थित, मोदी जी की नसिया, इंदौर में अपने प्रवचनों की शुरुआत यह कह कर की माता तू दया करके, कर्मो से छुड़ा देना, इतनी सी विनय तुमसे, चरणों में जगह देना। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


इंदौर। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, इंदौर एवं सोशल ग्रुप फैडरेशन, इंदौर रीजन के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रसंत आचार्य विहर्ष सागर महाराज ने बड़ा गणपति स्थित, मोदी जी की नसिया, इंदौर में अपने प्रवचनों प्रवचनों की शुरुआत यह कह कर की माता तू दया करके, कर्मो से छुड़ा देना, इतनी सी विनय तुमसे, चरणों में जगह देना। गुरु देव कहते हैं माता याने जिनवाणी मां हे मां तुम दया करो। जीवन में दो माताओं का उल्लेख है, एक ममता की मां, जो हमें जन्म देती है दुसरी, मां भाव देती है, समता का भंडार है वो।

समता हमें निर्ममता का भाव सिखाती है

दूसरी मां जिनवाणी माता यानी समता की माता। एक के पास प्यार, दुलार से भरपूर है तो दूसरी मां के पास समता, ज्ञान भरपूर है। एक ममता का पाठ पढ़ाती है, तो दूसरी ज्ञान, समता का पाठ पढ़ाती है। हमने जन्म लिया ममता की माता की गोद से और किलकारियां भरी जिनवाणी माता की गोद में। यह माता हमारा इतना ध्यान रखती है कि हमें सिद्धालय भेज देती है। समता हमें निर्ममता का भाव सिखाती है, अपनी आत्मा पर दया मत करो, अपनी आत्मा पर निर्ममता का भाव ही सबसे बड़ी दया है। गुरुदेव बताते हैं कि संसार यदि उत्तर दिशा की ओर है तो मोक्ष दक्षिण दिशा की ओर है, इन दोनों में 36 का आंकड़ा है। गुरुदेव ने कहा कि जिनके पास 24 तीर्थंकर हो वह व्यक्ति कैसे परेशान हो सकता है? यह पंचम काल का हाल है यहां कर्म किसी को नहीं छोड़ते डरो तो कर्म से डरो, पाप से डरो। हम हंसी हंसी में कर्म बांध लेते हैं वही कर्म उदय में आते जाते हैं और हमें तकलीफ देते हैं।

समाज कम है ,मंडल अधिक हो गए

आपने, देव, शास्त्र, गुरु पर श्रद्धा के कारण एक विशेष स्थान बना रखा है । महावीर के भक्त होकर आपमें एकता का अभाव है, समाज कम है ,मंडल अधिक हो गए। यदि मंडल – कमंडल से जुड़े रहो तो संस्कारों से भर जाते हो और दूर रहते हो तो अहिंसा से भर जाते हो,। हमें अज्ञानता को तोड़ना है। एक पत्रकार ने आचार्यश्री से पूछा कि आप महाराज क्यों बन गए ? तो गुरु वर ने कहा कि भगवान बनने के लिए। फिर उसने प्रश्न किया कि आपने अपने मां-बाप परिवार को छोड़ दिया तो आचार्य श्री ने कहा कि हमने अपने मां-बाप का नाम रोशन कर दिया। हम सबके दिल को जीतेंगे।

हम तो आपकी खाली झोलियां को भर देंगे

गुरु देव ने कहा कि जो सब देते हैं, वह हम नहीं देते, पर जब भी देते हैं तो किसी से कम नहीं देते , विश्वास ना हो तो इस चातुर्मास में देख लेना हम तो आपकी खाली झोलियां को भर देंगे। मुनि श्री विजयेश सागर महाराज ने कहा कि भगवान अंधकार को नष्ट करने वाले तो आपके चरण है, यदि यह चरण दूर हो गए तो हम संसार में अनंत काल तक भटकते रहेंगे। दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फैडरेशन के मिडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आज आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज जी के पावन सानिध्य में समाज के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी, फैडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश विनायका हंसमुख गांधी, योगेंद्र काला, राजेंद्र सोनी, नीरज मोदी, पारस पांड्या, ऋषभ पाटनी, पुर्व पार्षद मनोज काला, पवन जैन, प्रिंस पाल टोंग्या, रितेश पाटनी, आदि ने भाग्यशाली कूपन का विमोचन किया । चातुर्मास निष्ठापन पर भाग्यशाली साधर्मियों को गुरुवर की ओर से मंत्रित रजत मंगलमय कलश प्रदान किए जाएंगे। धर्मसभा के प्रारंभ में मंगलाचरण प्रियंका दीदी द्वारा किया गया। धर्मसभा का सफल संचालन कमल काला द्वारा किया गया।

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