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प्रवचन: श्रावक भी हंस की जिनवाणी के मोती चुगकर अपना जीवन उज्ज्वल बनाते है – आचार्य सुनील सागर


सारांश

सुनील सागर महाराज ने कहा कि जब बसंत आता है तो प्रकृति मुस्कुराती है और जब नगर में संत आते हैं तो संस्कृति महक जाती है। पढ़िये अभिषेक जैन बिट्टू की रिपोर्ट… 


जयपुर। मानसरोवर में मंगल विहार के बाद आचार्य सुनील सागर महाराज ने कहा कि जब बसंत आता है तो प्रकृति मुस्कुराती है और जब नगर में संत आते हैं तो संस्कृति महक जाती है, खिल जाती है। संत आते हैं तो समाज में, नगर में सुख, शांति, समृद्धि और सुसंस्कारों की लहर दौड़ जाती है।

मानसरोवर वो होता है, जहां हंस जाते हैं, पाए जाते हैं तो यह श्रमण जो कि अध्यात्म जगत के राज हंस होते हैं और इनके आदर्शों पर चलकर श्रावक भी अपना जीवन हंस की तरह धर्म जिनवाणी के मोती चुगकर उज्ज्वल बनाते हैं।

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