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समाज, धर्मसेवा और उदारता की त्रिवेणी प्रतिपाल टोंग्या: परिवार को मिला संघपति बनने का दायित्व


आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के संघ के उज्जैन से भोपाल तक के ऐतिहासिक विहार में प्रतिपाल-कुसुम टोंग्या संघपति के रूप में दायित्व ग्रहण कर अद्भुत पुण्यार्जन किया। 30 मई को लालघाटी, भोपाल में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के इस विशाल संघ का भव्य प्रवेश होगा। भोपाल से पढ़िए, मनमोहन झांझरी की यह खबर…


भोपाल। समाजसेवा और धर्मप्रेम की प्रतिमूर्ति, प्रतिष्ठित व्यवसायी तथा दानमना प्रतिपाल-कुसुम टोंग्या परिवार ने एक बार पुनः अपने आध्यात्मिक समर्पण और सेवाभाव का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के संघ के उज्जैन से भोपाल तक के ऐतिहासिक विहार में प्रतिपाल-कुसुम टोंग्या संघपति के रूप में दायित्व ग्रहण कर अद्भुत पुण्यार्जन किया।यह विहार केवल संतों का गमन नहीं, बल्कि धर्म, तप और संयम की महायात्रा है और इस पुण्य यात्रा में टोंग्या परिवार का यह योगदान न केवल समाज के लिए प्रेरणा है, अपितु यह जैन संस्कृति की जीवंत परंपरा का स्मरणीय अध्याय है। प्रतिपाल टोंग्या केवल एक सफल व्यवसायी ही नहीं, बल्कि गोमटगिरी तीर्थ क्षेत्र के पदाधिकारी के अलावा भी कई धार्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण पदों पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

उनका संपूर्ण जीवन “परमार्थ ही पुरुषार्थ है” की भावना से अनुप्राणित है। यह प्रेरणा उन्हें विरासत में मिली है। उनके पिताश्री, स्वर्गीय रतनलाल टोंग्या ‘डेरियावाले’, जो स्वयं धर्मपरायण, दानशील एवं समाजसेवा में समर्पित रहे। उन्हीं की प्रेरणा से आज पूरा टोंग्या परिवार धर्म आराधना और सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में निष्ठापूर्वक अग्रसर है। अब समूचे भोपालवासियों के लिए हर्ष और गौरव का क्षण है कि 30 मई को लालघाटी, भोपाल में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के इस विशाल संघ का भव्य प्रवेश होगा। यह अवसर न केवल धार्मिक दृष्टि से विशेष है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, सत्संग और समर्पण का दिव्य संगम भी है। आइए, हम सभी प्रतिपाल टोंग्या एवं उनके परिवार के इस अलौकिक पुण्य कार्य को प्रणाम करते हुए संघ के स्वागत में तन, मन, धन से सहभागी बनें।

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