समाचार

अनेकांत सिद्धांत के व्यवहारिक प्रयोग से सभी समस्याओं का समाधान संभव : राष्ट्र गौरव डॉ. इंदु जैन ने हिंदू सम्मलेन में दिया प्रेरक उद्बोधन 


साकेत स्थित डीडीए पार्क में विशाल स्तर पर हिंदू सम्मेलन का किया गया जिसमें सभी धर्म के प्रतिनिधियों को विशेष वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था। अल्पसंख्यक आयोग की विशेषज्ञ सलाहकार सदस्य डॉ. इंदु जैन राष्ट्र गौरव को जैन धर्म की ओर से विशेष वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया। दिल्ली से पढ़िए, यह खबर…


दिल्ली। स्थानीय साकेत स्थित डीडीए पार्क में विशाल स्तर पर हिंदू सम्मेलन का किया गया जिसमें सभी धर्म के प्रतिनिधियों को विशेष वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था। अल्पसंख्यक आयोग की विशेषज्ञ सलाहकार सदस्य डॉ. इंदु जैन राष्ट्र गौरव को जैन धर्म की ओर से विशेष वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया। उन्होंने जैन धर्म के सिद्धांतों में संघ के पंच परिवर्तन का समावेश करते हुए हज़ारों लोगों के समक्ष अपनी बात कही। उन्होंने सर्वप्रथम स्कंद पुराण के श्लोक ‘नाभे पुत्रश्च ऋषभः, ऋषभाद् भरतो भवेत् तस्य नाम्ना त्विदं वर्ष भारतं चेति कीर्त्यते।। इस श्लोक को पढ़कर ऋषभदेव के पुत्र भरत के नाम से स्थापित भारत भूमि को नमन किया। डॉ. इंदु जैन ने जैनधर्म के अनेकांत, स्याद्वाद, नयवाद, अणुव्रत आदि सिद्धांतों को बताते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि कर्मभूमि के प्रारंभ में राजा ऋषभदेव द्वारा प्रजा के जीवनयापन के लिए असि, मसि,कृषि, विद्या, शिल्प, वाणिज्य इन छह कर्मों का ज्ञान सभी को कराया और प्रजाजन को जीविकोपार्जन तथा श्रेष्ठ जीवन जीने की का सिखाई। पुत्री ब्राह्मी को अक्षर विद्या सिखाई। जिससे लिपि का नाम ब्राह्मी पड़ा और ब्राह्मी लिपि को सभी लिपियों की जननी का गौरव प्राप्त है। पुत्री सुंदरी को अंक विद्या सिखाई, जिससे गणित का विकास हुआ। ऋषभ पुत्र सम्राट चक्रवर्ती भरत के नाम से देश का नाम भारत पड़ा।

 अनेकांत के सिद्धांत को अपनाने से ही आपसी सौहार्द 

डॉ. इंदु जैन ने कहा कि अनेकांत के सिद्धांत को अपनाने से ही आपसी सौहार्द की भावना का विकास संभव है और इससे विश्व में शांति की स्थापना हो सकती है। चौबीस तीर्थंकरों के महत्वपूर्ण उपदेशों के साथ ही भगवान और भक्त के बीच संवाद के रूप में प्राकृत भाषा की गाथा बोलकर अहिंसा की सुंदर व्याख्या करते हुए अपना वक्तव्य पूर्ण किया। इस महत्त्वपूर्ण सम्मेलन में संघ एवं विभिन्न धर्म से जुड़े कुछ विशेष व्यक्तियों महत्त्वपूर्ण विचार अभिव्यक्त किए। संचालन लालिमा ने किया। इस वृहद हिंदू सम्मेलन में हिंदू सम्मेलन समिति साकेत के अध्यक्ष ब्रिगेडियर अमूल अस्थाना, संयोजक संजीव वेडेकर, दिल्ली में संघ के महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व, सभी धर्म के प्रतिनिधि, हज़ारों की संख्या में साकेत और आसपास के हर उम्र वर्ग के प्रतिभागी उपस्थित थे।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shree Phal News

About the author

Shree Phal News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page