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आदिभरत उत्सव उत्साह के साथ मनाया : जन्मोत्सव पर प्रभातफेरी, अभिषेक व विधान हुआ आयोजित


आदि परमेश्वर भगवान श्री आदिनाथ स्वामी का जन्म तप कल्याणक महोत्सव पश्चिम क्षेत्र में बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भारत के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट भरत स्वामी का जन्मोत्सव भी मनाया गया। पढ़िए ओम पाटोदी की विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। आदि परमेश्वर भगवान श्री आदिनाथ स्वामी का जन्म तप कल्याणक महोत्सव पश्चिम क्षेत्र में बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भारत के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट भरत स्वामी का जन्मोत्सव भी मनाया गया। स्थानीय श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, समर्थ सिटी में प्रातःकालीन बेला में भगवान आदिनाथ स्वामी का अभिषेक, पूजन और शांतिधारा सम्पन्न हुई। भगवान ऋषभदेव और चक्रवर्ती सम्राट भरत (पिता-पुत्र) दोनों का जन्म एक ही तिथि पर हुआ था, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं।

पाटोदी के अनुसार भगवान ऋषभदेव के जन्म के समय जो शुभ दिन, शुभ लग्न, शुभ योग, शुभ चंद्रमा और शुभ नक्षत्र थे, वही सभी योग चक्रवर्ती सम्राट भरत के जन्म के समय भी उपस्थित थे। उस समय चैत्र कृष्ण नवमी, मीन लग्न, ब्रह्मयोग, धनु राशि का चंद्रमा तथा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र था। इन सभी शुभ योगों ने उन्हें मानव से महामानव बनाया। भगवान ऋषभदेव के साथ मंदिर में पहली बार भगवान भरत स्वामी का स्वलिखित अर्घ्य भी चढ़ाया गया। विश्व शांति के लिए विश्व मंगल शांतिधारा का लाभ धवल-चर्चित ओम पाटोदी परिवार, कुहु-सौरभ जैन, सजल-संतोष जैन, महेंद्र-पिंकी जैन तथा नीरज-पूजा जैन परिवार ने प्राप्त किया। गोम्मटगिरि जैन तीर्थ क्षेत्र में भी प्रातः जयघोष के साथ प्रभातफेरी निकालकर भगवान का अभिषेक-पूजन किया गया।

इसी प्रकार कल्पतरु जिनालय, ढाई द्वीप, सुमतिधाम, एलजन सिटी, गांधी नगर, ग्रेटर बाबा, त्रिमूर्ति धाम और मलयगिरि तीर्थ क्षेत्र सहित सभी जिन मंदिरों में भव्य आयोजन के साथ भगवान ऋषभदेव और चक्रवर्ती सम्राट भरत स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। ज्ञान वर्धनी पाठशाला एवं वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के सदस्यों ने “वर्धमान 2550” और “भरत का भारत” लिखे टी-शर्ट पहनकर विश्व शांति के लिए “जियो और जीने दो” का संदेश भी प्रसारित किया।

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