गेरसप्पा की प्रसिद्धि यहां पर अवस्थित अति प्राचीन ऐतिहासिक चतुर्मुख जैन बसदी एवं भारत के सबसे ऊँचे जलप्रपातों में से एक गेरसप्पा जल प्रपात की वजह से है। यह क्षेत्र अत्यंत मनोरम एवं अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। हाल ही में भारतीय डाक विभाग के मेंगलोर डाक घर में यहां की जैन बसदी (मंदिर) पर दो चित्रात्मक पोस्ट कार्ड एवं एक विशेष पर्मानेंट पिक्टोरियल कैंसीलेशन (पीपीसी) जारी किया है। इंदौर से पढ़िए, ओम पाटोदी का यह आलेख…
इंदौर। गेरसप्पा की प्रसिद्धि यहां पर अवस्थित अति प्राचीन ऐतिहासिक चतुर्मुख जैन बसदी एवं भारत के सबसे ऊँचे जलप्रपातों में से एक गेरसप्पा जल प्रपात की वजह से है। यह क्षेत्र अत्यंत मनोरम एवं अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। हाल ही में भारतीय डाक विभाग के मेंगलोर डाक घर में यहां की जैन बसदी (मंदिर) पर दो चित्रात्मक पोस्टकार्ड एवं एक विशेष परमानेंट पिक्टोरियल कैंसिलेशन (पीपीसी) जारी किया है। जिस पर इस ऐतिहासिक बसदि (भव्य मंदिर) की छवि को प्रदर्शित करते हुए नीचे गेरसप्पा ज्योतिनगर एसओ पिन कोड-581384 लिखा गया है।
क्या होते हैं पीपीसी
भारतीय डाक विभाग समय-समय पर विभिन्न विषयों पर डाक सामग्री जारी करके देश की सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक एवं सामाजिक विरासत को विश्वव्यापी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। पीपीसी अर्थात स्थायी सचित्र निरस्त्रीकरण (परमानेंट पिक्टोरियल कैंसिलेशन) एक पोस्ट मार्क है, जो भारतीय डाक विभाग द्वारा अपने महत्वपूर्ण स्थानों से लगाई जाने वाली एक विशेष मुहर है। इसके द्वारा प्रसिद्ध पर्यटन स्थल, धार्मिक महत्व के स्थान अथवा जीवित/निर्जीव वस्तुओं को उजागर करने वाली प्रतिकृति/चित्र/डिजाइन आदि को दिखाता है प्रदर्शित करता है। डाक टिकट संग्रहक एवं वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि चतुर्मुख बसदी एक प्राचीन जैन मंदिर है, जो भारत के कर्नाटक राज्य में उत्तर कन्नड़ जिले के होन्नावर तालुक में गेरुसोप्पा में स्थित है। यह मंदिर शरावती नदी के तट के पास स्थित है। इस चतुर्मुख मंदिर का निर्माण 1562 ईस्वी में चेन्नाभैरादेवी के शासनकाल के दौरान किया गया था। यह मंदिर मध्ययुगीन कर्नाटक की वास्तुकला उत्कृष्टता, धार्मिक सद्भाव, और सांस्कृतिक समृद्धि का एक मौन गवाह है।
चेन्नाभैरादेवी एक साहसी जैन वीरांगना
पाटोदी ने बताया कि चेन्नाभैरादेवी एक साहसी जैन वीरांगना थी, जिसने देश के दक्षिण तटों पर सुरक्षा कवच की भांति खड़े रह कर वर्षों तक देश में घुसपैठियों को रोका। उसने पुर्तगालियों से कई युद्ध करके उन्हें धुल चटाई। भारत के ज्ञान इतिहास में रानी चेन्नाभैरादेवी एक मात्र ऐसी विरांगना है जिसने 50 वर्ष से अधिक एकछत्र राज किया। उनका शासनकाल सन् 1552 से 1606 तक यानी लगभग 54 साल की अवधि का माना जाता है। हाल ही में भारत सरकार ने उनके सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया है।
क्या है इतिहास जैन विरासत का
गेरसप्पा का क्षेत्र विजयनगर साम्राज्य के सलुवा राजवंश द्वारा शासित एक जैन राजधानी था। कहा जाता है कि इस क्षेत्र में 1,084 मंदिर थे, लेकिन वे नष्ट हो गए और वर्तमान में केवल छह ही बचे हैं। जिसमें यह मन्दिर वर्तमान में भले ही कुछ जीर्णशिर्ण हो रहा है परन्तु इसका महत्व, इसका वास्तु विज्ञान और यहां विराजमान जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ स्वामी के साथ अजीत नाथ स्वामी, सम्भव नाथ स्वामी और अभिनन्दन नाथ स्वामी जी मनोज्ञ प्रतिमाएं अपनी वीतराग छवि से सभी का मन मोह लेती है। मुख्य बसदी के अलावा, अन्य संरचनाओं, मूर्तियों और शिलालेखों के अवशेष आसपास के क्षेत्र में पाए जाते हैं, कई अब खंडहर अवस्था में हैं, कहा जाता है कि इस क्षेत्र में 1,084 मंदिर थे लेकिन, वे नष्ट हो गए और वर्तमान में केवल छह ही बचे हैं। जो एक समय के महत्वपूर्ण जैन संस्कृति केंद्र की गवाही देते हैं। भारत सरकार एवं डाक विभाग प्राचीन ऐतिहासिक धर्म क्षेत्र को प्रकाशित करने का यह उपक्रम अत्यंत प्रशंसनीय है।
आभार व्यक्त किया
पीपीसी जारी होने पर वर्धमानपुर शोध संस्थान एवं जैन समाज के राजेश जैन फुलजी बा, राजमल सूर्या, सुरेंद्र मूणत, राजेश मोदी, विजय बाफना, महेंद्र सुंदेचा, राजेंद्र सराफ, हेमंत मोदी, अभिषेक जैन टल्ला, अनिल लुनिया, सर्वेश मंडलेचा, सौरभ जैन, पवन पाटोदी, सुशील मोदी, ललित जैन, स्वप्निल जैन, अभय पाटोदी, सुशील गोधा, दिलीप मोदी, मनोज जैन, ओम पाटोदी आदि हर्ष व्यक्त किया एवं जैनिज्म फिलेटली सोसायटी के अध्यक्ष प्रदीप बालोद, पूर्व अध्यक्ष सुधीर जैन सतना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रमोद जैन पांडिचेरी, सचिव मीठालाल जैन, को-आर्डिनेटर तेजकरण जैन राजनांदगांव एवं हेमंत जैन जबलपुर ओम पाटोदी, जयंत डोसी इंदौर, आशीष भंडारी भोपाल, सचिन सिंघई बेंगलुरु आदि ने जैनिज्म फिलेटली सोसायटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (वरिष्ठ) और श्री महावीर कुंदुर हुबली का और इस पीपीसी जारी करवाने में सक्रिय भूमिका निभाने वाले सभी श्रावक श्रेष्ठी, अधिकारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया।













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