हमारे साथ बारात है आंसुओं की। मैंने दर्द की दुल्हन संग सगाई रचाई है। तुम मेरे साथ चलकर मुस्कुरा सको तो-विश्वास दिलाता हूं जिन्दगी का उपसंहार उजालो के आंगन में होगा, जहां आनंद की शहनाई और अपनत्व के मंगलाचार का महा महोत्सव होगा। इंदौर से पढ़िए, हरि हर सिंह चौहान की यह खबर…
इंदौर। हमारे साथ बारात है आंसुओं की। मैंने दर्द की दुल्हन संग सगाईरचाई है। तुम मेरे साथ चलकर मुस्कुरा सको तो-विश्वास दिलाता हूं जिन्दगी का उपसंहार उजालो के आंगन में होगा, जहां आनंद की शहनाई और अपनत्व के मंगलाचार का महा महोत्सव होगा। यह सृजनात्मक विचार आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य ऐलक श्री निशंकसागर जी महाराज के हैं, जो मुस्कान के राजहंस थे। जो अपनी मुस्कान की स्मृतियों को छोडकर अपने अंतस की चेतना में खो गए। हम सब से दूर जरूर हैं, पर हम गुरु भक्तों में उनके प्रति आस्था आज भी है। सकल दिगम्बर जैन समाज नसिया और निशंक सागर भक्त मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आचार्य विद्यासागर जी महाराज के शिष्य एलक श्री निशंक सागर जी के पाठ और भजन का आयोजन मंगलवार शाम 7:30 बजे अतिशयकारी श्री चिंतामणि पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर जबरी बाग नसिया जी में रखा गया है। पाठ के उपरांत युवा संगीतकार गायक शुभम जैन द्वारा ऐलक श्री के प्रति सुमधुर भजनों द्वारा विनयांजलि अर्पित की जाएगी।













Add Comment