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पिच्छी और कमंडल साधु के स्वालंबन के दो हाथ हैं: मुनि श्री अपूर्वसागर जी महाराज ससंघ का भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह हुआ


आचार्य धर्म सागर श्रमण भवन में चातुर्मास के बाद पूज्य युगल मुनिराज श्री अपूर्वसागर जी और मुनि श्री अर्पितसागर जी तथा क्षुल्लक श्री महोदयसागर जी महाराज का भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह मनाया गया। यह आयोजन सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से किया गया। मंगलाचरण, गुरुपूजन आदि कार्यक्रम हुए। पढ़िए सलूंबर नगर से यह खबर…


सलूंबर नगर। यहां के आचार्य धर्म सागर श्रमण भवन में चातुर्मास के बाद पूज्य युगल मुनिराज श्री अपूर्वसागर जी और मुनि श्री अर्पितसागर जी तथा क्षुल्लक श्री महोदयसागर जी महाराज का भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह मनाया गया। यह आयोजन सकल दिगंबर जैन समाज और मुनि सेवा संघ समिति, पं. अरविंद जी रामगढ़ और बाल ब्रह्मचारी नमन भैया जी के तत्वावधान में हुआ। मुनि संघ सेवा समिति सचिव अक्षय गड़िया ने बताया कि वर्ष में एक बार दिगंबर गुरु चातुर्मास समापन के बाद पुरानी पिच्छिका को त्याग कर नवीन पिच्छिका धारण करते हैं।

संगीतमय गुरु पूजन किया

कार्यक्रम का संचालन दिनेशचन्द्र ढालावत ने किया और चेतना जी एवं जयप्रकाश शाह के मंगलाचरण से कार्यक्रम की शुरूआत हुई। निक्की तोरावत और बदामीलाल सिंघवी ने अपना उद्बोधन दिया। पिच्छिका परिवर्तन से पहले संगीतमय गुरु पूजन किया गया। जिसमें राजस्थानी, गुजराती, बंगाली, दक्षिणी, मेवाड़ी, जोधपुरी वेषभूषा पहने हुए श्रावक श्राविकाओं ने नाचते गाते हुए अष्ट द्रव्य से गुरु पूजन की। दिगंबर जैन साधु का संयम उपकरण पिच्छी और कमंडल है। यह जिन मुद्रा एवं करुणा का प्रतीक है। पिच्छी और कमंडल साधु के स्वालंबन के दो हाथ हैं। इनके बिना अहिंसा मय महाव्रत का पालन नहीं हो सकता। आदान निक्षेपण समिति तथा प्रतिस्थापना समिति का पालन नहीं कर सकते। इस कारण समस्त दिगंबर साधु वर्ष में एक बार पीछी का परिवर्तन करते हैं।

मुनिश्री ने बताए पिच्छी के गुण

मुनि श्री अपूर्वसागर जी महाराज ने पीछी के गुण में बताया कि यह धूल ग्रहण नहीं करती, लघुता रहती है, पसीना ग्रहण नहीं करती, सुकुमार झुकने वाली होती है ।यहां तक भी देखा गया है कि मोर पंख यदि आंखों में लग जाए तो बहुत चुभता नहीं है इससे आंसू नहीं आते कष्ट नहीं होता। सबसे बड़ी बात यह है कि मयूर स्वयं पंख छोड़ते हैं। इस कारण कोई हिंसा भी नहीं होती।

पिच्छी भेंट करने का इन्होंने लिया लाभ

पूज्य मुनि श्री अपूर्व सागर महाराज को पिच्छी भेंट करने का लाभ मनोहरलाल जसराज ढालावत और मुनि श्री अर्पित सागर महाराज को फलटन के श्रावक चेतन गांधी परिवार ने पिच्छी भेंट की। क्षुल्लक श्री महोदय सागर महाराज की पिच्छी पवन भवरलाल ढालावत परिवार ने प्राप्त की।

यह समाजजन और श्रावक गण मौजूद थे

इस अवसर पर समाज के सेठ लक्ष्मीलाल ढालावत, रमेश कुणीया, प्रभुलाल दोषी, धीरजमल भूता, मनोहर ढालावत, छगनलाल दोषी, गणेशलाल मालवी, शांतिलाल गुणावत, मोहनलाल खेतावत, भवरलाल ढालावत, रामचंद्र ढालावत, यशवंत पारडीया, बदामीलाल सिंघवी, कन्हैयालाल भीमावत, मणिलाल मालवी , सुमित्रा भिमावत, उषा पारडीया, कलावती , कमला गांधी, ज्योति शाह, पुष्पलता कोड़ियां, कल्पना, आशा, भगवती, अंजना, पूजा, दीपाली, सुनीता, अश्विनी मालवी, लीना, सविता आदि समाजजन उपस्थित थे।

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