उस समय समवशरण की रचना का वर्णन आता है जिससे तीर्थंकर भगवान धर्म देशना देते हैं। वर्तमान में समवशरण नहीं है, अब जिनालय का निर्माण किया जाता है। यह मंगल देशना आचार्य शांति सागर के आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव अंतर्गत आचार्य श्री की प्रतिमा स्थापना के अवसर पर धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रकट की। टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…
टोंक। पहले तीर्थंकर भगवान धर्म तीर्थ का प्रवर्तन करते थे। उस समय समवशरण की रचना का वर्णन आता है जिससे तीर्थंकर भगवान धर्म देशना देते हैं। वर्तमान में समवशरण नहीं है, अब जिनालय का निर्माण किया जाता है। यह मंगल देशना आचार्य शांति सागर आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव अंतर्गत आचार्य श्री शांति सागर जी की प्रतिमा स्थापना के अवसर पर धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रकट की। उन्होंने कहा कि जिनालय भी निर्माण भी समवशरण के बराबर ही है। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के समाज पर अनंत उपकार है ,आचार्य श्री शांतिसागर जी नहीं होते तो हम भी नहीं होते। वर्तमान श्रमण परंपरा नहीं होती।समाज द्वारा साधुओं की समाधि स्थल के लिए कार्य योजना बनाई गई किंतु विघ्न आने से पुण्यदाता परिवार द्वारा गुरु मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया।
गुरु मंदिर का निर्माण उससे अधिक पुण्य का कार्य है। महान पुरुषों के दर्शन करने से पुण्य में वृद्धि होती है। गुरु मंदिर निर्माण से सभी को दर्शन का लाभ मिलेगा उनके गुणों का स्मरण करने से पुण्य अर्जित करेंगे। कलई परिवार ने द्रव्य का उपयोग कर गुरु मंदिर बनाया है। गुरु के दर्शन भी भगवान के दर्शन के बराबर है क्योंकि, णमोकार मंत्र में आचार्य साधु परमेष्ठी का वर्णन है सभी को पुण्य अर्जित कर धर्म से लगाव होना चाहिए। धर्म के प्रति लगाव से सुख शांति और समृद्धि होकर पुण्य में वृद्धि होती है। कमल सराफ के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि प्रतिदिन सभी को भगवान के दर्शन अभिषेक पूजन के साथ आचार्य श्री शांति सागर जी के दर्शन पूजन करना चाहिए।
चातुर्मास वर्षा योग समिति द्वारा दोपहर को अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। जिसमें आचार्य श्री वर्तमान सागर जी का पूजन नगर के अनेक सांस्कृतिक संगठनों द्वारा महिला मंडल द्वारा संगीत में पूजन की गई। आचार्य श्री के पूजन के बाद अचार्य संघ में लगातार चौक आहार विहार में सहयोग करने वाले बाल ब्रह्मचारी गज्जू भैया, तारा दादी, परमीत, छोटू भैया समर कंठाली, सनत जैन इंदौर, निर्मला दीदी, प्रेमलता पाटनी आदि का स्वागत सम्मान किया गया। जिन लोगों ने नए आजीवन नियम व्रत लिए उनका सम्मान किया।













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