मंथन पत्रिका

दोहों का रहस्य -5 धैर्य को धारण करें : धैर्य रखना और अपने कर्म करते रहना ही सच्ची धार्मिकता है


दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाहित होती हैं। यह संक्षिप्तता के साथ गहरे विचारों को व्यक्त करने का एक अद्भुत तरीका है। दोहों का रहस्य कॉलम की पांचवी कड़ी में पढ़ें मंजू अजमेरा का लेख…


धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,

माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय

धीरे-धीरे सब कुछ हो जाएगा। माली यदि सैकड़ों घड़े पानी एक बार में ही डाल दे, तो भी फल ऋतु आने पर ही मिलते हैं।

इसी प्रकार, आध्यात्मिकता के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति चाहे कितने ही प्रयास करे, उसे फल तभी मिलता है जब समय और परिस्थिति अनुकूल होती हैं। जीवन में कोई भी कार्य तत्काल फल नहीं देता। ईश्वर में आस्था और धर्म के मार्ग पर धैर्यपूर्वक चलना आवश्यक है।

जैसे पौधे को फलने-फूलने में समय लगता है, वैसे ही हमारी प्रार्थना, ध्यान और सुकर्मों का परिणाम भी ईश्वर की कृपा और सही समय पर मिलता है।

जल्दबाजी करना, अधीर होना, या किसी चीज़ को जबरदस्ती जल्दी प्राप्त करना न केवल व्यर्थ है, बल्कि यह हमें मानसिक और आध्यात्मिक शांति से भी दूर कर सकता है। इसलिए धैर्य रखना और अपने कर्म करते रहना ही सच्ची धार्मिकता है।

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