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टोंक में धर्मसागर पाठशाला के बच्चों ने आचार्य श्री का पूजन कर सीखा जीवन निर्माण का संदेश : आचार्य वर्धमान सागर जी बोले — बचपन के संस्कार और माता-पिता की आज्ञा से बनता है जीवन


टोंक में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बच्चों को अनुशासन, भक्ति और संस्कारों से जीवन निर्माण का मार्ग बताया। पाठशाला के 250 से अधिक बच्चों ने पूजन कर प्राप्त किया आशीर्वाद। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…


टोंक। नगर में आचार्य धर्मसागर रात्रि पाठशाला द्वारा आयोजित विशेष पूजन एवं धर्मसभा में पूज्य आचार्य वर्धमान सागर जी ने बच्चों और श्रद्धालुओं को जीवन निर्माण हेतु मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि पाठशाला से ही जीवन का आधार बनता है, और धर्मसभा भी एक पाठशाला के रूप में कार्य करती है जहां गुरुजन आत्मिक गुणों से परिपूर्ण जीवन के लिए प्रेरित करते हैं।

आचार्य श्री ने विशेष रूप से कहा कि बचपन से मिलने वाले धार्मिक संस्कार ही जीवन की दिशा तय करते हैं, और माता-पिता की आज्ञा का पालन कर व्यक्ति आत्मिक सफलता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने मोबाइल जैसी लत से दूर रहने, कटु वचन से बचने और कुकर्मों को छोड़ने की सीख दी।

श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का महत्व समझाया

 

धर्मसभा में बच्चों द्वारा सामूहिक पूजन के पश्चात दीप प्रज्ज्वलन और पाद प्रक्षालन किया गया। धर्मसागर पाठशाला की निरंतरता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आचार्य श्री ने प्रसिद्ध भजन ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ का उल्लेख करते हुए श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का महत्व समझाया।

प्रवचन से पूर्व आचार्य श्री के सान्निध्य में एडवोकेट और सीए सम्मेलन आयोजित हुआ जिसमें मंदिरों के संरक्षण पर विचार साझा किए गए। रविवार को त्रिलोक चंद बोरदा परिवार को नवधा भक्ति पूर्वक आहार कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

समारोह में टोंक, जयपुर, कोटा, इंदौर, कलकत्ता, निवाई से गुरुभक्त शामिल हुए। जिला प्रमुख सरोज बंसल, पूर्व सभापति लक्ष्मी देवी जैन, विनायक जैन, श्यामलाल फुलेता, विमल बरवास, सुनील आंडरा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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